बाल कविता – तितली 

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लाल-हरी-नीली-पीली,
रंग- बिरंगी है तितली |

फूल-फूल से रस पीती,
इठलाती फिर उड़ जाती |

कभी यहाँ तो कभी वहाँ,
उड़ती जाने कहाँ-कहाँ |

पीकर मधु होती मदमस्त,
कभी न देखा इसको सुस्त |

छैल-छबीली, रंग-रंगीली,
लाल-हरी- नीली -पीली |

बाग-बगीचों की रौनक,
बच्चों की है मनमोहक |

इन्द्रधनुषी-सप्तरंगों वाली,
प्यारी-न्यारी,नन्हीं तितली |

कोमल-कोमल पंखों वाली,
रंग- बिरंगी सुन्दर तितली |

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

 

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