किसान 

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भोर   हुई   जागा  किसान,
हुठा के हल भागा किसान |

कठिन परिश्रम करे किसान,
खेत  स्वर्ण  से भरे किसान |

गाय – भैंस पालता किसान,
दूध    निकालता   किसान |

जाड़ा,गर्मी,वर्षा सहे किसान,
धूल – माटी  खाये  किसान |

सीमा  पर  लड़े पुत्र किसान,
देश का मानसम्मान किसान |

फिर  क्यों  कर्जदार किसान,
फांसी  खा कर मरे किसान |

भारत  में  दुर्भाग्य   किसान,
पाईपाई को मुहताज किसान |

मिटने  को  अस्तित्व किसान,
सरकार जगाए भाग्य किसान |

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

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