क्या मिलेगा ? 

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देश में हाहाकार मचा
बड़ा अजीब देशभक्ति का ढोंग रचा

कर-करके कोरा हो-हल्ला
नेताजी उड़ा रहा रसभरा-रसगुल्ला

टी. वी. पे गिराके दो घड़ियाली आंसू
फैंक-फैंक कर जुमले धांसू

हुई सियासत नंगी खुल्लमखुल्ला
लूट रहे मजा पादरी-पुजारी और मुल्ला

स्वर्ग और जन्नत के सपने हंसी दिखाकर
अरबों-खरबों बना रहे नश्वर जगत बताकर

निज देश जला रहे आपस में लड़-लड़के
क्या मिलेगा नीले-पीले, हरे-नारंगी झंडे ऊंचे कर-करके ?

 मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

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