लघुकथा सृजन-17

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तिथि-26-12-17
वार-मंगलवार
विषय-जन्मकुंडली
मां तुम पंडितों के चक्कर  मत लगाया करो और न ही हर किसी को मेरी जन्म कुंडली दिखाया करो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता।
अरे चुप बैठ बिंदिया की ग्रह भी इन्हीं ने बताई थीं देख सब कुछ सच निकला…..कल जब पंडित जी आएं तो इस तरह मुँह मत बजाना बस जो भी बताएं चुपचाप सुनती रहना।
   नियत समय पर पंडित जी आ गए जलपान के उपरांत मां ने पूछना शुरू किया….महाराज तीन साल से हो गए लड़का ढूंढते पर कहीं बात ही नहीं  बनती….अभी समाधान करते है आपकी समस्या का कहते हुए पंडित जी ने ज्यों ही पत्रा खोली उनका फोन घनघना उठा…..फोन उठाते हुए….क्या हुआ रमा ….हां-हां… बोलो…..कुछ तो बोलो आगे….नहीं तुम्हें कुछ नहीं होगा ….मैं अभी पहुँचता हूँ…..##
   सारा सामान वहीं पर छोड़ पंडित जी अपनी समस्या का समाधान खोजने को दौड़ पड़े।
नाम-दीपासंजय*दीप*
शहर-बरेली

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