महिला सशक्तिकरण -मनीषा जोशी

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महिला सशक्तिकरण
किसी भी देश के विकास की गति को जानना हो तो पहले उस  देश की महिलाओ और बच्चों के विकास की गति को जानना चाहिए । जिस देश में महिलाऐ व बच्चों की दशा अच्छी होगी, वह देश हमेशा प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगा ऐसा मेरा मानना है ।ठीक उसी प्रकार जिस परिवार में महिलाओ को  आदर, सम्मान  मिलता हैं ।वह परिवार हमेशा खुशहाल देखा गया हैं ।महिला सशक्तिकरण का अर्थ सिर्फ महिला के सम्मान तक सीमित नही महिला सशक्तिकरण का अर्थ- जब एक महिला सभी परिवारिक ,सामाजिक बन्धनों के दायरे से बाहर निकल अपने लिए बिना शर्त  स्वतंत्र हो जीती है, जब वो बिना किसी बन्धन अपनी खुशी के   12742661_1306134086070633_3803148438525139952_nलिए जी सके अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए कार्य कर सके अपने निर्णय स्वयं ले सके।चाहे वो पारिवारिक हो देश हित मे हो या सामाजिक हो।भारतीय महिलाओ का दीर्घकाल से शोषण होता आया हैं ।और अभी भी हो रहा हैं ऐसा नही हैं कि इस क्षेत्र में बदलाव नही आया कई सरकारी योजनाए महिलाओ के अधिकारों के लिए बनी हैं। किन्तु अभी भी प्रत्येक महिला को इसकी जानकारी नही हैं।महिला सशक्तिकरण के लिए सिर्फ सरकार की योजनाओ सें लाभ होगा यह एक भ्रम हैं। प्रत्येक महिला का विकास उसके घर से ही संभव हो सकता हैं। इसके लिए प्रत्येक महिला को अपने अधिकार पता होने चाहिए व घर व समाज में व्याप्त महिला विरोधी ताकतों के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए ।एक महिला ही दूसरी महिला को समझ सकती हैं ।एक दूसरे को शिक्षित करना अपने अधिकारों की जानकारी देना यह हम महिलाओ का भी दायित्व बनता हैं ।समाज व परिवार का भी ये दायित्व है कि  महिलाओ का सम्मान  करे उनके अधिकारों की रक्षा करे। तभी देश उन्नति के पथ पर अग्रसर होगा ।महिलाऐ समाज का निर्माण करती हैं शिक्षा समाज को सुदृढ करती है महिला शिक्षा एक सुन्दर समाज का निर्माण करती हैं ।महिला सशक्तिकरण में महिला शिक्षा एक अहम भूमिका निभाती हैं ।इसलिए  परिवार ,समाज व सरकार की ज़िम्मेदारी है ,कि प्रत्येक महिलाशिक्षित हो
हमारी सरकार इस क्षेत्र में काम तो कर रही हैं मगर वह अभी भी अपर्याप्त हैं।साथ ही हर परिवार की जिम्मेदारी है कि वह अपने परिवार की बेटियों को शिक्षित करे।इसके लिए सरकार को और प्रचार व प्रयास करने होगे ,क्योंकि महिला सशक्तिकरण के लिए आवश्यक है। कि पुरूष और महिलाओं के बीच समाज द्वारा होने वाले भेदभाव को सर्वप्रथम खत्म किया जाए ।महिला जन्म से उसके विवाह तक, माता पिता द्वारा जो भेद-भाव पुत्र और पुत्री में होता है उसकी रोकथाम होना अतिआवश्यक हैं। अगर माता पिता पुत्र -पुत्री की समान दृष्टि से परवरिश करेंगे तो हमारी बेटियाँ अवश्य सशक्त होगीं ।ऐसा मेरा मानना हैं ।हमारे देश में आज भी स्त्री  पुरूष के समान अधिकार नही हैं यह एक विडम्बना है। हमारे देश में कई  समाज सुधारक हुवे जिन्होंने महिलाओ को उनके अधिकार दिलाने के कई प्रयास किये ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जिन्होंने विधवाओ की दशा सुधार के लिए कार्य किया आचार्य विनोभा भावे जिन्होंने विधवा पुनर्विवाह पर कार्य किया स्वामी विवेकानंद आदि आज भी कई सामाजिक संस्थान महिला विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। किन्तु आज भी महिलाओ की दशा पूर्ण रूप से नही सुधरी यौन शोषण, बाल मजदूरी, शिक्षा की कमी दहेज उत्पीड़न आदि के कारण कई भयावह कृत्य आज भी स्त्री के जीवन में घटित  होते रहते हैं ।इस नव युग में तो स्त्री की अस्मिता की सुरक्षा, गहन चिंता का विषय है ।चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक आये दिन बलात्कार की घटनाऐ मन विचलित कर जाती हैं कही लड़कियों के पहनावे पर तो कही उनके खुले विचारों पर आघात ।महिला सशक्तिकरण को चोट पहुचाता हैं ।मानसिक रूप से भी महिलाऐ समाज  व परिवार के आघातों से बच नही पाई है ।
चाहे वो संयुक्त परिवार हो या एकल परिवार  पढ़ी लिखी महिलाए भी घरेलू अत्याचारों से नही बच पाई हैं।समाज व परिवार की इज्जत के कारण वह विरोध करने में झिझक महसूस करती है ।चाहे वह दहेज की मांग हो, पति का शराबी होना हो,  स्त्री का शारीरिक शोषण हो,  अपने जीवन साथी का विश्वासघात हो,या परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा स्त्री का अपमान व शोषण हो ।वह यह सब समाज में इज्ज़त व प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए सहन करती है ।इस मानसिकता  को बदलना स्त्री सशक्तिकरण के लिए आवश्यक है ।साथ ही स्त्रियों के लिए समाज की मानसिकता को भी विज्ञापन व महिला विकास ,महिला अधिकारों पर लिखे अच्छे साहित्य लेख आदि के प्रचार प्रसार से कुछ हद तक बदलना संभव है। महिलाओ को पुरूषों के समान अधिकार देकर सरकार इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान कर सकती है।सोचे तो क्या नही हो सकता आज महिलाऐ पुरूषों  से कम नही हैं हर क्षेत्र में महिलाऐ देश व समाज को आगे बढ़ाने में सहायक है ।साथ ही परिवार व बच्चों की देखभाल कर आने वाली एक स्वस्थ व सशक्त पीढ़ी भी  तैयार कर रही है । तो समाज महिलाओ को आगे बढ़ाने में क्यों पूर्ण रूप से सहयोग क्यों नही कर सकता ।
@मनीषा जोशी

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