हर फिल्म में महिलाओं का पाॅवरफुल रूप…

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मैंने हमेशा लीग से हटकर फिल्में बनाने की कोशिश की है जिसमे मैं काफी हद तक कामयाब भी रहा। मैने हमेशा ही अपनी फिल्मों के लिए रिसर्च पर फोकस किया है और उस रिसर्च को सही तरीके से तराशने की भी कोशिश की है लेकिन उस कोशिश में कई बार मुझे कंट्रोवर्सी में भी फंसना पड़ा। चांदनी बार से लेकर इंदु सरकार तक मैने कई महिला प्रधान फिल्में बनाई जिनमें मैने उनका एक अलग ही पाॅवरफुल रूप दिखाने की कोशिश की है, यह कहना था फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर का जो एशियन बिजनेस स्कूल के छात्रों से रूबरू हुए तथा उनके साथ अपने कई अनुभव बांटे। इस अवसर पर फिल्म इंदु सरकार की नायिका कीर्ति कुल्हारी भी मौजूद थी, उन्होंने बताया कि यह फिल्म आपातकाल से जूझती उस महिला की कहानी है जो अपनी बात को मजबूत ढं़ग से कहना चाहती है लेकिन उसका पति उसे ऐसा करने से रोकता है। पिंक के बाद इस फिल्म में भी दर्शकों को मेरे किरदार की मजबूती नजर आएगी। 
इस अवसर पर एशियन एजुकेशन ग्रुप के निदेशक संदीप मारवाह ने कहा कंट्रोवर्सी और मधुर भंडारकर एक ही सिक्के के दो पहलू बन चुके है उनकी हर फिल्म में किसी न किसी बात को लेकर कंट्रोवर्सी जन्म ले ही लेती है चाहे वो चांदनी बार हो, फैशन हो या फिर इंदु सरकार हो। लेकिन मधुर अपनी फिल्म में उस सच्चाई को दिखाने से बिलकुल पीछे नहीं हटते और यही उनकी अपनी पहचान है। 
अंत में संदीप मारवाह ने मधुर भंडारकर व कीर्ति कुल्हारी को अंतराष्ट्रीय फिल्म व टेलीविजन रिसर्च संेटर की आजीवन सदस्यता से सम्मानित किया।
प्रेस सचिव
सुनील पाराशर

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