मैथिलि पुस्तक “भोर-सँ  साँझ-धरि  ” का भव्य  विमोचन समारोह 

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” संघर्ष और सफलता की महाकथा ”  :—–

प्रसिद्ध मैथिलि व् हिंदी लेखक व् दिल्ली में वर्तमान में स्पेशल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत श्री रबिन्द्र नारायण मिश्र की पुस्तक “भोर-सँ  साँझ-धरि  ” का भव्य  विमोचन समारोह प्रवासी भवन, 50, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, निकट आई टी ओ, नई दिल्ली में कल शाम को  सम्पन्न हुआ। समारोह बहुत ही सुंदर, हिन्दी , मैथिली एवम् पंजाबी भाषाओं का त्रिवेणी अनोखा, अपूर्व संगम !
प्रसिद्ध साहित्यकार व् कवि  प्रोफेसर कुलदीप सलिल ने कहा कि साहित्यकार व् कलाकार आैर फनकार की काेई खास जाति नहीं हाेतीा, और न ही वे किसी  राज्य  या देश की सीमाओं  के बंधनों में बँधे नहीं हाेते ! वे  तो समाज के लिए खुदा के द्वारा इस दुनिया में भेजे गए  एक अनुपम फरिश्ता के समान है, जो अपने अद्भूत रचनाओं के माध्यम से समाज काे सही मार्ग  दिखाने का काम करते  है। आपने शेरों शायरी से  कल की शाम की शमा बांध दिया और सभी श्रोता वाह- वाह कर उठे ।

प्रसिद्ध निबंध लेखक व् स्पेशल मेट्रोपोलिटन मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट श्री ओम सपरा ने कहा कि आदमी के दिमाग में अज्ञान के हिमखंड को तोड़ने काम ”पुस्तकें ” बखूबी करती हैं ा

आप ने कहा ही भाषा पर कभी भी कोई बन्दिशें नहीं होनी चाहिये । इसका ना तो कोई सरहद है , ना ही जाति पाँति । धर्म से भी परे है ये भाषा । दरअसल मिश्रा जी द्वारा  अपनी जीवन यात्रा को जीवंत और संस्मरणात्मक रूप में और सशक्त शैली में अपने जीवन की विषम परिस्थितियों व् संघर्ष की घटनाओं का वर्णन करने व् अन्य पाठकों के लिए प्रेरणाप्रद लिखने के कारण उनका यह प्रयास एकदम सफल हुआ है और यह वास्तव में शब्दों की यात्रा बन गयी है ! आपने कहा कि मिश्रा जी के इस पुस्तक महान लेखिका व् कवयित्री डॉ शेफ़ालिका  वर्मा जी के कमलों से हो रहा है , जिन्हे मैथिलि की महा देवी वर्मा भी कहा जाता है , यह हमारा सौभाग्य है !

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शेफालिका वर्मा जी और कवयित्री निवेदिता मिश्रा झा ने कहा कि अपने जीवन की सचाई को अपने पाठकों को बताना सबसे कठिन कार्य  है और कई बार लेखक कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों व् घटनाओं तथा पात्रों का नाम छिपाता  भी है और यह लेखक का अधिकार है , दरअसल जीवन वृत्त तो निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है , जो लेखक के जीवन के साथ लगातार घटती रहती है और सुख- दुःख, धुप छाव का घटना क्रम जीवन को आगे धकेलता रहता है  और दोनों भाषाओं हिंदी और मैथिलि में मिश्रित अपने विचार प्रस्तुत किये ! और लेखक को इस महत्वपूर्ण  लेखन हेतु बधाई दी !

जानकी देवी कॉलेज की व्याख्याता डॉ सविता झा खान, मैथिली साहित्यकार व आलोचक डॉ कैलाश कुमार मिश्र ने बहुत ही भावपूर्ण शैली मैं प्रमुखता मैथिलि में अपने विचारो को प्रकट किया- दोनों वक्ताओं का कथन था की लेखक श्री मिश्रा जी ने यथासंभव ईमान दारी से अपने जीवन वृत्त, गॉव से शहर तक की कटु अनुभवों वाली , असफलता और सफलता के अद्भुत मिश्रण की यात्रा प्रस्तुत करने का प्रयास किया अत आप ने मैथिलि का सम्मान किया है और मैथिलि के साहित्य में  श्री वृद्धि की है अत मिश्रा जी बधाई और साधु वाद के पात्र हैं  !

युवा मैथिली लेखक व वरिष्ठ फिल्मकार किसलय कृष्ण ने भी मैथिलि और हिंदी के वैभव की चर्चा की तथा लेखक को इस साहित्यिक योगदान हेतु बधाई दी  प्रकट की कि आप की नयी पुस्तकें शीघ्र प्रकाशित हों  और हम उसका स्वागत करेंगे  !

वरिष्ठ रचनाकार व् कवि उमेश मेहता जी के खुशनुमा सफल संचालन में, बहुत  ही जीवंत वातावरण में, मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ओम सपरा के संयोजन में सराबोर समारोह, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शेफालिका वर्मा जी की अध्यक्षता में, मुख्य अतिथि मैथिली अकादेमी के सचिव डॉ हरि सुमन बिष्ट एवं श्री नारायण कुमार, निदेशक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के सान्निध्य में पुस्तक विमोचन समारोह सम्प्पन हुआ।
प्रमुख वक्ता थे प्रेरणादायक प्रवक्ता व प्रसिद्ध युवा कवयित्री निवेदिता मिश्रा झा, कवि लेखक श्री ओम सपरा, हंसराज कॉलेज के पूर्व व्याख्याता प्रोफेसर कुलदीप सलिल, आकाशवाणी के पूर्व सहायक केंद्र निदेशक व मित्र संगम पत्रिका के संपादक श्री प्रेम वोहरा,  ने अपने सारगर्भित विचार प्रस्तुत किये। श्री विजेंदर सिंह पुंडीर, मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विशेष अतिथि थे।
प्रसिद्ध गीतकार व ग़ज़लकार, मित्र संगम पत्रिका के साहित्य संपादक हरभजन सिंह देयोल ने अपने गीत और ग़ज़ल गायन से कार्यक्रम  का काव्यमय शुभारम्भ  किया  और ओजस्वी गायक भारतेंद्र मासूम ने  देशभक्ति के गीत व वरिष्ठ कवि राम सिंह राही जी ने सुंदर गीत व कविताएं प्रस्तुत करके कार्यक्रम को संगीतमय बनाकर श्रोताओं को भावुक व आह्लादित कर दिया। 

कार्यक्रम में वरिष्ठ टी वी युवा पत्रकार कुमार सामत, लेखक मुकेश जैन पारस, गीतकार कल्पना झा, कवि अशोक सपरा ”हमदर्द”, प्रदीप झा, वरिष्ठ एडवोकेट राकेश चिटकारा, कवि गुरचरण सिंह चरण, विमल जी मिश्रा, तपन कुमार झा, मैथिली गायक श्याम सुंदर श्याम, आर एन मिश्र, मणिकांत झा, आशा मिश्र, शंकर मुखर्जी, एम राय, कवि हरि सिंह मीणा, श्री शर्मा जी आदि कई गणमान्य लेखक व अतिथि उपस्थित हुए और कार्यक्रम की शोभा बधाई !

कार्यक्रम काफी सरस व् भव्य वातावरण में संपन्न हुआ और जीवन में निरंतर आगे बढ़ने और विषमताओं से संघर्ष के सात्विक आह्वान के साथ श्रोताओं का मन जीत लिया !

– ओम  सपरा 

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