मनुष्यता को बचाने के लिए अहिंसा जरूरी: अरुण जैन 

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गाजियाबाद, 22 नवम्बर 2017
वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस के आॅडिटोरियम में अरिहंत चेरिटेबल एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह एवं अहिंसा परमो धर्मः पर आधारित विचार संगोष्ठी और नाटक ने खूब समां बांधा। विचार संगोष्ठी के जरिये वक्ताओं ने वैश्विक स्तर पर फैल रही हिंसा के लिए मनुष्य को दोषी माना तो नाटक के जरिये घमंड से भी पनप रही हिंसा के प्रति चिंता व्यक्त की। इस मौके पर जैन धर्म के अहिंसापरक आदर्शों पर आधारित ‘अभिनंदन’ नामक स्मारिका का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर उल्लेखनीय सेवाओं के लिए सुखी परिवार फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक, पत्रकार एवं लेखक श्री ललित गर्ग सहित अनेक समाजसेवी लोगों को सम्मानित किया गया, जिनमें केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के पूर्व चेयरमैन श्री अरुण कुमार जैन, अतर्रा महाविद्यालय बांदा के पूर्व प्राचार्य डाॅ. विशनलाल गौड़ व्योमशेखर, सुप्रसिद्ध साहित्यकार डाॅ. प्रभाकिरण जैन, वसुंधरा जैन समाज मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री नवीन कुमार जैन एवं आवास विकास परिषद वसुंधरा के पूर्व अधीक्षण अभियंता श्री सी. के. जैन हैं। इन सभी को मेवाड़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डाॅ. अशोक कुमार गदिया एवं ट्रस्ट की अध्यक्षा डाॅ. अलका अग्रवाल ने शाॅल, गुलदस्ता एवं प्रतीक चिन्ह प्रदत्त कर सम्मानित किया।
समारोह में श्री अरुण कुमार जैन ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि हिंसा पर काबू पाकर ही हम मनुष्यता को बचा सकते हैं। मनुष्य जब अहंकारी हो जाता है तो उसके भाव, वाणी व काया के जरिये अहिंसा पैदा होती है, जो कि खतरनाक है। इससे बचना और मनुष्यता को बचाना बहुत जरूरी है। उन्होंने अहिंसा के प्रशिक्षण की आवश्यकता व्यक्त की। डाॅ. अशोक कुमार गदिया ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की। अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि आज हमारी सोच खतरनाक हो गई है। इससे बचने के लिए आत्मिक शुद्धि आवश्यक है। डाॅ. विशनलाल गौड़ व्योमशेखर ने कहा कि अहिंसा के प्रचार के लिए हर हाल में मनुष्यता को बचाना होगा तो सुप्रसिद्ध साहित्यकार डाॅ. प्रभाकिरण जैन ने भाव की शुद्धि को ही अहिंसा बताया। सुपरिचित लेखक व पत्रकार श्री ललित गर्ग ने कैसे भगवान महावीर ने मन को शुद्ध रखने के उपाय बताए हैं, इस पर प्रकाश डाला। उन्होंने आचार्य श्री तुलसी एवं आचार्य श्री महाप्रज्ञ की जीवन घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने अहिंसा को प्रायोगिक रूप देकर समाज को नई दिशा दी। आदिवासी समाज में गणि राजेन्द्र विजय द्वारा किये जा रहे अहिंसा के प्रयोगों की भी चर्चा की। श्री सी. के. जैन और श्री नवीन कुमार जैन ने कहा कि जीवित प्राणियों का सम्मान करना भी अहिंसा है।
इससे पूर्व आमंत्रित अतिथियों ने भगवान महावीर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया। ट्रस्ट की अध्यक्षा डाॅ. अलका अग्रवाल की ओर से अतिथियों को बुके, स्मृति चिह्न व शाॅल भेंटकर सम्मानित किया। दिल्ली-एनसीआर के स्कूली बच्चों के लिए अहिंसा विषय पर आयोजित की गई निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को नकद राशि, ट्राॅफी और प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। डाॅ. अलका अग्रवाल ने अपने सम्बोधन में ट्रस्ट व इसके उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। ट्रस्ट की ओर से ‘अभिनंदन’ नामक स्मारिका का विमोचन भी किया गया। इसके बाद ’अर्जुन माली और घृणा के फूल’ नामक नाटक की प्रस्तुति की गई। सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना अंजना राजन एंड ग्रुप की ओर से दर्जन भर कलाकारों ने आधे घंटे तक भगवान महावीर के आदर्शों व अहिंसा पर आधारित नाटक का मंचन कर सबका दिल जीत लिया। नाटक में बताया गया कि घमंड करना भी हिंसा है। इसे मन से दूर करके ही अहिंसा का भाव पैदा किया जा सकता है। सभी कलाकारों ने अपने अभिनय कौशल से नाटक के पात्रों को जीवंतता प्रदान की। अंत में सभी कलाकारों को ट्रस्ट की ओर से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन पत्रकार व कवि श्री चेतन आनंद ने किया।
(बरुण कुमार सिंह)

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