माता स्तुति…

0
83

 

हे जग कल्याणी, वीणापाणी, सकल भुवन की माता ।
तुमको नित ध्वावैं, स्तुति गावैं, श्रीहरि विष्णु विधाता ।।
मुझको अपनाओ, राह दिखाओ, पद पंकज का भूखा ।
तेरे  बिनु  माता, अवध अनाथा, ममता वंचित  सूखा ।।

नारी नित लुटती, ईज्जत मिटती, शक्ति स्वरूपा अबला ।
अब   पुन:  सँवारो, मातु  उबारो, कर दो   माते  सबला ।।
बेटी   बिलखाती,  मारी   जाती, पीड़ा   बहु    दुखदाई ।
बहनों  के  दुखड़े, अवनत  मुखड़े, नज़र   फेरते  भाई ।।

कलमें भी बिकतीं, अवशा दिखतीं, सत्य राह दिखलाओ ।
अब बेटी बनकर, रूप बदलकर, माँ दुर्गे फिर आओ ।।
नवरात सुहावन, सब बिधि पावन, जय जय हो जयकारा ।
लेकर उर आशा, छोड़ निराशा, माँ को अवध पुकारा ।।

 

अवधेश कुमार अवध

LEAVE A REPLY