मैंने चुप रहना छोड़ दिया- डॉ सुलक्षणा अहलावत

0
168

मैंने चुप रहना छोड़ दिया, unnamed-1
आँखों से कहना छोड़ दिया।
ये असर है तेरी चाहतों का,
हवा संग बहना छोड़ दिया।

कल तक डरती थी ज़माने से,
तेरा नाम भी जुबाँ पर लाने से।
फिर ये हुआ असर मुझ पर,
जिंदगी बदल गयी तेरे आने से।

खुद में ही सिमटी रहती थी मैं,
दर्द सारे चुपचाप सहती थी मैं।
तेरी मोहब्बत ने हौंसला दिया,
वरना खंडहर सी ढहती थी मैं।

इक तेरी वजह से वजूद मिला,
मुरझाया हुआ मन मेरा खिला।
बेशक आ जाये अब मौत मुझे,
जिंदगी से ना रहा शिकवा गिला।

ज़माने की भीड़ में फैलाई बाहें,
रोशन की जिंदगी की अँधेरी राहें।
“सुलक्षणा” की तलाश खत्म हुई,
तुम हो वही जिसे ढूँढती थी निगाहें।

LEAVE A REPLY