मेरे गीतों को अधरों से….

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मेरे गीतों को अधरों से जब भी तुम गाती होगी !
सच बोलो न तुमको मेरी याद बहुत आती होगी !!
तुम्हे याद है जब हम तुमसे,
शाम को मिलने आते थे !
खुशी खुशी तुम हँसकर मेरे,
 सीने से लग जाते थे !!
कंगन,चूड़ी, पायल,बिंदी,
सूट नये दिलवाते थे !
पानीपूरी, चाट, समोसा,
हम दोनों फिर खाते थे !!
जब घर से बाजार प्रिये तुम,
सजधज कर जाती होगी !
सच बोलो न तुमको मेरी याद बहुत आती होगी !!
मैं अपने स्मृतियों को ही,
गीत बनाकर गाता हूँ !
मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारों के,
आगे शीश झुकाता हूँ !!
बिना बुलाये कभी न जाता,
कवियों की दरबारों में !
छप जाते हैं गीत हमारे ,
कभी कभी अखबारों में !!
अँजुरी भर शब्दों को मेरे,
जब भी तुम पढ़ती होगी !
सच बोलो न तुमको मेरी याद बहुत आती होगी !!
आशीष तिवारी जुगनू
इंदौर

1 COMMENT

  1. तहे दिल से शुक्रिया सर जी
    मेरा सौभाग्य है आपने मुझे स्थान दिया सदैव आभारी रहूँगा !

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