मेरे सपने

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नमन    तुम्हें  मां  भारती  नमन   है बारम्बार
लाज  रखना  दीन की  करना स्वपन  साकार
नमन   तुम्हें   मां   शारदे   नमन  है  बारम्बार
शक्ति  मेरी  बनो  मां   देश   हित  साधूं  कार्य
स्वपन  बहुत  से  पल  रहे  कैसे  करूँ बखान
वाणी  मेरी  बनो  मां तुम  मुझमें बसियो आन
मैं  चाहूँ  भय  मुक्त  रहे  इस  जग में  हर नारी
नहीं बने कोई निर्भया  नहीं  बने  कोई  बेचारी
कत्लगाह  बने ज्ञानालय  जो हैं  निंदा  के पात्र
जीवन  में  प्रकाश भरें  जहां  ज्ञान  पाएं  छात्र
पर्यावरण  के जहर  से  जन  जीवन पाता कष्ट
प्रदूषण  मुक्त  जग   बने   हों  जाएं   रोग  नष्ट
भू-खनन  को  रोकने  का   हो  समुचित  प्रबंध
वृक्ष  न  काटे  जाएं अब  इस  पर लगे प्रतिबंध
प्रकृति  का  असंतुलन  तभी  रोक  सकेंगे  हम
स्वच्छ   जल,  वर्षा,  हवा  तब   पा  सकेंगे  हम
निर्भय  सभी  हो  देश में  क्या बालक क्या वृद्ध
अंत हो पाप  अधर्म का  सभी  रहैं  प्रेम आबद्ध
शिक्षा  और  संस्कार  का  मिले  सभी  को  दान
बन  पाएगा  एक   दिन  तभी  मेरा  देश   महान
शस्यश्यामला   बने  धरा   कृषक  खुशी  मनाएं
कर्ज  और  लाचारी    से  वे  जीवन  नहीं गवाएं
गौ  माता  की  रक्षा  को  किए  जाएं  सभी यत्न
सेवा  और  सुश्रुषा   के  भी   किए  जाएं प्रयत्न
गौ  हत्या  है  पाप, जो  भी   पाया   जाए  लिप्त
आजीवन कारावास  हो  गौ  हत्या  जघन्य कृत्य
जाति  धर्म  के   नाम   पर   बांटे  देश  को  लोग
भष्ट्र  मानसिकता  देश  को दे रही  असाध्य रोग
अंत  हो  गंदी  सोच  का  देश   का  हो  विकास
फले  फूले  गणतंत्र  सदा सब करें सतत  प्रयास
आने  वाली  पीढ़ी   का  तब   ही   होगा  उत्कर्ष
भविष्य   सुनिश्चित   होगा   मनाएंगे   सब   हर्ष
अमन  चैन  हो  विश्व   में  मिट  जाएं   सब  द्वेष
विश्व  पटल  पर  विश्व  गुरु   बन  जाएगा  देश
सत्य  धारें  सत्य  स्वीकारें  सत्य  करें  सब  कर्म
सतयुग  आ  जाए  पुनः  राम   लखन  लें  जन्म
प्रेम   विश्वास  और   दया   से   सब   रहें भरपूर
काम,  क्रोध,  मद,  लोभ   से   रहें  सदा  ही  दूर
जन्म  यहीं  हर  बार   मिले  यहीं  मैं  त्यागूँ  देह
स्वपन   मेरा   सच्चा   करो   माँ   बरसाओ  नेह
✍🏻नाम-दीपा संजय”*दीप*”

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