मोहब्बत

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saurabh kumar thakur
जब आपने कह दिया है तो क्यों रुकेंगे
किसी के सामने हम अब क्यों झुकेंगे ।
मोहब्बत किया है हमने, कोई चोरी नही
मरे सारी दुनिया परन्तु हम क्यों मरेंगे ।
दिल में उसे बसाया है सच में सौरभ
भूलें सारी दुनिया पर उसे नही भूलेंगे
डर नही किसी का भी अब मोहब्बत में
मोहब्बत किया है तो पूरा करके छोड़ेंगे ।
वायदा किया है उससे सातों जनम का
तो साथ ही जिएंगे और साथ ही मरेंगे ।
हम वो मौसम नही की साल में एकबार आए
अब किया है मोहब्बत तो हरसंभव निभाएँगे
सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक)
मुजफ्फरपुर, बिहार

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