“मौखिक/लिखित सम्भोग”

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दोस्तो!
ये प्रस्तुत लेख वर्तमान अर्थ -काम युग में व्याप्त मानसिक  व्यभिचार/ कुकृत्य-कलुषिमा के बारे में हैं  ना कि लिंग भेद करते हुऐ स्त्री/लड़की या पुरुष/लड़के के बारे  में। हाँ, इस लेख को सामान्य दृष्टि कोंण से पढ़ा जाये। परोक्ष या अपरोक्ष  किसी की निजी जिंदगी से इसका सीधे सरोकार नहीं। इस दुनिया मे मित्र ,दुश्मन , नाते रिश्ते सभी हैं तो बात तो किसी ना किसी माध्यम से सभी करेंगे पर जवान युवा युवती अगर इश्क़ मुश्क़ की बातें प्रायः करते हैं तो वासना की आग पैदा होंना  स्वाभाविक है “आग में घी पड़ेगा तो हवन होगा ही-  कामुकता का रोग लगेगा ही”। कोई ना रोक सका न कभी रोक सकेगा।
जो औरत दो जून की रोटी के लिये तन वैश्या बनके बेचती है उसकी मजबूरी है। उसे कोठे पर बैठाया तो इस निष्ठुर समाज ने। उसका भी एक चरित्र होता है जो केवल कोठे तक ही सीमित होता है। पर वर्तमान युग के आधुनिक अघोषित वेश्याओं के बारे में एवम उनके ग्राहकों/यानि कि दोस्तों के बारे में क्या कहा जाये?
आजकल व्हॉट्सएप्प , फ़ेसबुक अथवा अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से लड़कियों , लड़कों एवम स्त्री पुरुष में बढ़ता हुआ कामुकता का रोग इस समूचे समाज के पतन का अभीष्ट कारण बन गया है।  इसके शिकार विशेष कर वो लड़के लड़कियाँ ज्यादा हो रहे हैं जो अंतर्मुखी हैं। भला कोई पूछे कि चाट बॉक्स में क्या गीता, रामायण, कुरान या बाइबल का पाठ सीखते हो या करते हो? अरे क्या मानसिक या दैहिक पतन क्या सम्भोग/ शारीरिक मिलन से ही होता है?
ये तो कामुक बातों से भी होता है। “ऐसे लोगों के सिर्फ 10% परस्पर सम्वाद तो ठीक होते हैं  बाकी 90%सम्वाद कामुक होते हैं ये बात विभिन्न  सामाजिक सर्वे के माध्यम से निकल कर आई है” मनोविज्ञान के अनुसार कुत्सित विचार के आने मात्र से ही मस्तिष्क सक्रिय हो उठता है तदानुसार शरीर से हार्मोन्स का संचार भी वैसा ही होंने लगता है। लड़कों में वीर्य स्खलन व लड़कियों में स्त्राव बढ़ जाता है। जितनी ज्यादा कामुक बातें होती हैं उनका रसास्वादन एक लड़के या लड़की तक ही सीमित नहीं रहता। ये लोग नए चेहरे यानि आधुनिक मीडिया कोठों के ग्राहक तलाशते हैं ताकि नवीनता मिलती रहे। भला कोई पूछे कि इनमें या वैश्या / या उसके ग्राहक में क्या फर्क रह गया।बिचारी वैश्या तो मजबूर थी या है परिस्थिति वश; भला इनके सामने ऐसी कोंन सी मजबूरी है जो अपना तन मन व जीवन  वासना की अतृप्त आग में झोंक रहे हैं?  शारीरिक एवम मानसिक कुंठा एवम यौन रोगों का निरन्तर बढ़ना इस मौखिक/लिखित वासनात्मक सम्वाद की वजह से काल रूप धारण कर रहा है। लड़कों का हस्तु मैथुनलड़कियों का कृत्रिम योनि मैथुन, सफेद पानी बढ़ना, रज साइकिल का बिगड़ना या स्पर्म काउंट का वीर्य में कम होंना सन्तति पैदा करने लायक नहीं छोड़ रहा। नीम हकीम या झोला छाप इनसे ढेरों कमाई कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कामुक लेख एवम चित्र इनकी चुनिंदा विषय वस्तु और मन लगाने के साधन के अतिरिक्त वासना में लिप्पता बढ़ा रहे हैं। हालात इतने अधिक खराब हो गये हैं कि लड़के ही नहीं अपितु लड़कियाँ भी बलात्कार जैसे घृणित कृत्य को अंजाम दे रहीं हैं। इस दौर में आमने सामने या साथ रहते हुये किसी के बारे में राय कायम करना कठिन हो रहा है तो विकट आश्चर्य है कि लड़के लड़की किसी का दिल चैट बॉक्स में बैठकर  कैसे देखलेते हैं या पढ़ लेते हैं नतीजन यही मानसिकता उनकी गृहस्थी में आग लगाती है फल स्वरूप पति पत्नी  के रिश्ते खराब होकर तलाक को बढ़ावा दे रहे है और  समाज बिखर रहा है।
जवान लड़के लड़कियाँ रोज कामुक सम्वाद करेंगे तो आग तो शरीर मे लगनी ही है। वासना में लिपटने ही हैं।  वैश्या /ग्राहक तो पैसे लेकर/देकर संतुष्ट हो जाते हैं पर ये कुंठित लड़कियाँ /लड़के तो उन वेश्याओं/ग्राहकों से  ज्यादा बदतर होते जा रहे  हैं। चाट बॉक्स में इनकी रोज की उपस्थिति स्पष्ट प्रमाण है। आखिर कब तक?
आधुनिकता के नाम पर ये पतन की बाढ़ कब थमेगी? कब तक चलेगा ये मौखिक/लिखित सम्भोग?
जागिये!!!!!!!
(ये लेख एक सामान्य लेख है वर्तमान हालात के ऊपर; किसी व्यक्ति विशेष से इसका कोई सम्बन्ध नहीं)
डॉ. उमेश कुमार राठी

1 COMMENT

  1. समाज में जागरूकता फैलाने के लिए आज ऐसे ही यथार्थ लेखों की आवश्यकता है।
    सादर प्रणाम

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