मुंबई विश्वविद्यालय ने अपने बी.ए. के नये पाठ्यक्रम में आधुनिक हिन्दी कहानी को दिया स्थान…

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मुंबई विश्वविद्यालय ने अपने बी.ए. के नये पाठ्यक्रम में आधुनिक हिन्दी कहानी को स्थान दिया है। इस संकलन को श्रेष्ठ कहानियां – 2 कहा गया है और इसमें जो कहानीकार शामिल किये गये हैं उनके नाम हैं….

श्रेष्ठ कहानियाँ : भाग-२ – पाठ्यक्रम के लिए निर्धारित कहानियाँ

  1. वापसी – उषा प्रियंवदा
    2.अकेली – मन्नू भंडारी
    3. सिक्का बदल गया – कृष्णा सोबती
    4. गदल – रांगेय राघव
    5. घुसपैठिए – ओमप्रकाश वाल्मीकि
    6. गणपति गणनायक – सूर्यबाला
    7. कब्र का मुनाफ़ा – तेजेन्द्र शर्मा
    8.दलित ब्रह्मण – सत्यप्रकाश
    9. अंतिम बयान – कुसुम वियोगी

मुंबई विश्वविद्यालय के इस नये पाठ्यक्रम ने मुझे कई स्तरों पर ख़ुशी दी है। मुंबई हिन्दी साहित्य के मामले में मेरी कर्मभूमि रही है। मैनें पहली हिन्दी कहानी ‘प्रतिबिम्ब’ मुंबई में ही लिखी जो कि ‘नवभारत टाइम्स’ के साहित्यिक परिशिष्ठ में प्रकाशित हुई।

मेरे पहले कहानी संग्रह ‘काला सागर’ के प्रकाशक हैं वाणी प्रकाशन। इस टेक्सट बुक का प्रकाशन भी वाणी प्रकाशन से ही हुआ है। मेरी फ़ोन पर Vishwanath Sachdev जी एवंAditi Maheshwari Goyal व भाई अरुण महेश्वरी से बातचीत हुई। हम सब इस बात को लेकर ख़ासे मज़ेदार मूड में बातें करते रहे।

मेरे लिये इस पाठ्यक्रम की एक ख़ास विशेषता है – मुझे पहली बार किसी विश्वविद्यालय ने मुख्यधारा के पाठ्यक्रम में शामिल किया है – मुझे प्रवासी पेपर की बैसाखी से मुक्त कर के। मेरे लिये यह बहुत संतोषजनक स्थिति है कि मेरे लेखन को भारत की युवा पीढ़ी अपनी क्लास में पढ़ेगी और मैं उनके बीच चिरयुवा बन कर जिऊंगा। ‘

तेजेंद्र शर्मा
लंदन

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