नारी पर प्रताड़ना (कविता)

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कब तक सहूँगी प्रताड़ना, saurabh kumar thakur
कभी तो पूरी करो मेरी कामना ।
चीख-चीखकर रो रही हूँ मै,
कभी तो मान लो मेरी कहना ।
मत करो तुम मेरी अवमानना,
नही तो बाद में प पछताना।
नारी शक्ती बन कर तैयार हूँ मै,
अभी कभी मत मुझसे टकराना ।
मत करो तुम किसी पर प्रताड़ना,
दहेज के लिए बहुओं को मत जलाना ।
नही तो नारी चंडी बन जाएगी ।
फिर मुश्किल हो जाएगा तुम्हारा जीना ।
अब नही करना तुम किसी से प्रताड़ना,
अब तो है पूरा जागरुक जमाना ।
सौरभ कुमार ठाकुर (बालकवि एवं लेखक)
मुजफ्फरपुर, बिहार

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