नवोल्लास 

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आ गया नवोल्लास
जग गई एक नई प्यास…

दिखाया नटी ने रंग
यौवन में घुल गई भंग

आया-आया प्यारा बसंत
कदम लड़खड़ाये संत…

गोरी ने ली अँगड़ाई
चहुंओर मादकता छाई

जब बासंती हवा वही
जुदाई न प्रीतम सही

मनवा भाव जगाए
अंगना महक-महक जाए

आ गया नवोल्लास
जग गई एक नई आस… ||

मुकेश कुमार (ऋषि वर्मा)

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