‘नीले अक्स” काव्य संग्रह का लोकार्पण

0
93
IMG_20171022_120223
नई दिल्ली। दिनांक 21 अक्टूबर 2017 को गांधी हिन्दुस्तानी साहित्य सभा और विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान द्वारा संचालित सन्निधि संगोष्ठी में युवा कवयित्री नीलू ‘नीलपरी’ के कविता संग्रह  ‘नीले अक्स’ का  लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक लोकजंग प्रकाशन ने छापी है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मलयालम अौर तमिल के साहित्यकार श्री बाला सुब्रह्मण्यम जी ने कहा, “नीले रंग में प्रकृति और भावों को समाहित कर बिम्बों का एक सुंदर गुलदस्ता है ‘नीले अक्स’, जो समय, काल और स्थान की सीमाओं से परे हैं।”
विशिष्ट अतिथि योजना मासिक के संपादक श्री ऋतेश पाठक जी ने कहा, “युवा लेखकों में भाव पक्ष प्रबल होता है जो नीलपरी की लेखनी में झलकते हुए ‘नीले अक्स’ को विशिष्ट बनाता है।”
संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रसिद्ध गान्धीवादी श्री रमेश शर्मा जी ने कहा, “नीलू नीलपरी की कृति की परिकल्पना ही सच में मन को उद्वेलित कर जाती है। नारी मन की सुकोमल भावनाओं और तत्संबंधी वर्जनाओं के बीच के द्वंद्व को विश्लेषण करती लेखिका पाठकों के मन मस्तिष्क में अनेक सवाल छोड़ जाती है। आने वाले समय में नीलू लेखन का एक सशक्त हस्ताक्षर बनें ऐसी मेरी दुआ है।”
इस मौके पर गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा  की मंत्री आदरणीया कुसुमशाह जी भी मौजूद थी।
मंच संचालक केदारनाथ “शब्द मसीहा” जी ने कहा, “नीले अक्स की भूमिका लिखते हुए मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा था। कविता और वो भी जो जीवन से पैदा हो, पढ़ने पर पाठक के मन तक पहुँचती है। प्रस्तुत काव्य-संग्रह ‘नीले अक्स’ अपने अंदर  विभिन्न भावों को समाहित किए हुए जीवन के अनेक पक्षों पर मोहक चिंतन है। नीलू ‘नीलपरी’ एक ऐसी ही साहित्य साधिका है जो निरंतर अपने सृजन के पथ पर अग्रसर हैं।”
अतिथियों का स्वागत विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान के मंत्री श्री अतुल प्रभाकर जी ने किया‌ और नीलू के सर पर हाथ रख बड़े भाई और संरक्षक का फर्ज निभाते हुए ‘नीले अक्स’ के लिए और लेखन के लिए दिल से दुआ दी कि चारों दिशाओं में नाम कमाओ।
संग्रह पर बोलते हुए मार्क्सवादी साहित्यकार श्री संदीप तोमर जी कहते हैं, “नीलू जी एक व्याख्याता हैं, मनोविज्ञान की छात्रा रही हैं और साथ ही समाजसेविका होने के नाते उनका कार्यक्षेत्र बहुत विस्तृत है और उनकी कवितायें इन्हीं विस्तृत संवेदनाओं का विकल्प हैं। वे छंदमुक्त शैली को अपनाती हैं और अपनी कविताओं में बिम्बों का भरपूर प्रयोग करती हैं। उनकी कविताओं में नारी के कोमल मन की पड़ताल है तो विरह का संगीत भी हैं, तो दूसरी ओर नवयौवना की महक भी है।”
संग्रह पर चर्चा करते हुए अखिलेश द्विवेदी अकेला जी, जिन्होंने हाल ही में यौवनकाल ही में लिखी अपनी आत्मकथा का विमोचन किया, कहते हैं, “स्त्री की पीड़ा और प्रकृति में तादात्म का संगम है ‘नीले अक्स’, जो सारी कायनात को एक साथ समेटकर चलने में सक्षम है।”
महिला अधिकार अभियान मैगज़ीन की संपादिका कुलीना कुमारी जी ने मैगज़ीन के अक्टूबर अंक में नीलू द्वारा लिखित बुज़ुर्गों के उत्थान की सच्ची आपबीती और ‘नीले अक्स’ के बीच सेतु बनाते हुए कहा, “नीलपरी की लेखनी की यह विशिष्टता है कि वो मात्र रोना रोकर इतिश्री नहीं करती, बल्कि वे लेखिका रूप में एक ऐसी डॉक्टर हैं जो समाज की भ्रांतियों, समस्याओं के उन्मूलन के लिए कलम उठाकर उनका निदान भी करती हैं। ‘नीले अक्स’ में उनका भाव पक्ष बहुत प्रबल और समाज को एक नई दिशा देता जान पड़ता है। ‘नीले अक्स’ में प्रेम भी है, प्रकृति भी, विरह भी और आशा की किरण भी।”
‘नीले अक्स’ की कवयित्री नीलू ‘नीलपरी’ ने अपने रचनाकर्म पर बात रखते हुए कहा कि “ज़िन्दगी जीने का हर इंसान का अलग अंदाज होता है। कभी-कभी जीवन में ऐसे पल आते हैं जो कुछ कर गुजरने को प्रेरित करते हैं। उसी तरह मेरे जीवन पथ में ऐसे अनेक पड़ाव आये जिसके चलते मेरे हाथों में आई लेखनी की स्याही से अनूठे शब्दों की रचना होती चली गई। लेखन पांच साल पहले ही शुरू किया, धीरे-धीरे यह बढता गया। संग्रह ‘नीले अक्स’  सिर्फ मेरी आवाज नहीं, हर नारी मन की आवाज है। मेरी टैगलाइन ‘परी जो सिर्फ उड़ना चाहती है… पंख काट दो फिर भी उड़ान थमेगी नहीं….’ में परी सिर्फ मैं नही,  मेरे देश की हर बच्ची, हर यौवना, हर वृद्धा नारी है।
पुस्तक चर्चा में सन्निधि के संयोजक श्री लतांत प्रसुन्न जी, श्री मोहन हिम्मतानी जी, श्री राजीव तनेजा  जी, श्री एकोम सिंह जी , सोमा विश्वास जी, मधु मधुबाला जी , श्री ए. एस. अली खान, श्री मृत्युंजय साधक जी , कीर्ति जी , मिताली फूकन जी, जयश्री राय जी, बलराम शुक्ल जी, अलका त्यागी जी, सुप्रिया सिंह जी  सहित अन्य लोगों ने अपने विचार रखे।

LEAVE A REPLY