निर्भया कांड 16 दिसम्बर 2012

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आंख करोड़ों  नम  हुईं, खड़े  करोड़ों हाथ
निर्भया के कष्ट में सारा जग खड़ा था साथ
लेकिन स्वप्न ना सच हुए,ना ही मिली राहत
अंजान पथ निर्भया,आज भी हो रहींआहत
                   क्योंकि
संवेदनाएं मृत हुईं   कुछ ही  समय के बाद
हुआ प्रभावित वही बस जो रख पाया याद
पुनः पुनः जब घटित हो फिर से वही वृतांत
मिल जाती उस घाव को एक बार फिर खाद
                    वर्तमान में
यही है यक्ष प्रश्न क्या पुनरावृत्ति होगी ऐसे ही
क्या दोषी व्यक्ति घूमेगा स्वतंत्र जग में ऐसे ही
बेटियां इन भेड़ियों के चंगुल में फँसेंगी यूँ ही
हर बार तार-तार उनकी अस्मत होगी ऐसे ही
                 सोचिए ??
परिवार इस भीषण दंश को कब तक झेलेंगे
निर्लज्ज कब तक देश की अस्मिता से खेलेंगे
क्या कभी होगी सार्थक पहल इस गम्भीर विषय पर
या यों ही  भुक्त भोगी जीवन भर पापड़ बेलेंगे
✍🏻नाम-दीपा संजय”*दीप*”

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