लोकतंत्र के लिए न्यांयपालिका का स्वतंत्र होना जरूरी

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वीआईटी स्कूल ऑफ लॉ वेल्लोर यूनिवर्सिटी चेन्नई ने इंडिया हैबिटेट सेंटर में न्यायपालिका और न्यायिक जवाबदेही की स्वतंत्रता विषय पर एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जिसमे वीआईटी यूनिवर्सिटी के संस्थापक और कुलाधिपति डॉ. जी विश्वनाथन व दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य डी. मुरुग्सेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस मौके पर वीआईटी की अस्सिटेंट वाइस प्रेसीडेंट कांदम्भरी एस विश्वनाथन, कुलपति डॉ. आनंद ए. सैमुअल, वीआईटी के डीन प्रोफेसर गांधी. एम भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम में न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविद्द, स्कॉेलर्स, सिविल सोसायटी और छात्रों ने हिस्सा लिया।
इस मौके पर डी. मुरुग्सेन ने कहा कि इस सम्मेलन का जो विषय है वो आज के समय में बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र के लिए न्यायपालिका का स्वतन्त्र होना जरूरी है यह देश और न्यायापालिका दोनों की स्वतंत्रता का सवाल है उन्होंने कहा कि कई बार जो काम और निर्णय सरकार को करने चाहिए उसकी जिम्मेदारी न्यायपालिका पर डाल दी जाती है जबकि यह उसका काम नहीं है। न्यायपालिका को अपने देश के लोगों के प्रति ईमानदार होना चाहिए और पारदर्शी रवैया अपनाना चाहिए।
इस मौके पर डॉ. जी विश्वनाथन ने कहा कि देश के लोग चाहते हैं कि उनका न्यायधीश एकदम भगवान की तरह हो जिस पर वो भरोसा कर सके। आज देश में 3 करोड़ मामले कोर्ट में लंबित है और तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयलालिता का एक केस का निपटारा हो जाने में 21 साल लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि जहां अमेरिका में 10 लाख लोगों पर 107 न्यायाधीश हैं तो भारत में सिर्फ 18 न्यायाधीश ही हैं।
प्रेस सचिव
सुनील पाराशर

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