प्याज कुछ ज्यादा ही भाव खा रिया हेगा 

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 प्याज के दाम में दोगुना उछाल दिखाई दिया। किसानों  के चेहरों पर रौनक छाई वही प्याज का दाम सुनकर आम आदमी की हंसी गायब हो गई। कई जगहों पर बारिश के कारण प्याज ख़राब होने से इसकी मांग बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। बढ़ती प्याज की कीमत से प्याज के भाव आसमान पर हो गए। लोग अब कहने लगे है की ‘कुछ ज्यादा ही भाव खा रिया  ‘. खैर ,पहले गर्मी में यदि नकोली (नकसीर) होती तो उपचार स्वरूप प्याज फोड़ के सुंघाया जाता।लू लगने के डर से लोग जेब मे प्याज भी रखते थे।पोहे में ऊपर से प्याज की जगह मूली को उपयोग में लिया जा रहा।किन्तु प्याज की बात ही कुछ और है।मुक्के से फोड़ कर प्याज खाने वाले परेशान उन्हें चाकू से कतरे हुए प्याज की एक रिप वो भी मांगने पर मिलती ।सब्जी भाजी में प्याज की पकड़ मजबूत है।प्याज के बिना सब्जियों के स्वाद की लोग बाग झूठी तारीफ  करने लगे थे ।प्याज के भाव का रुतबा औऱ रिकार्ड ने तो  सेवफल को पीछे छोड़ दिया।पहले प्याज खाते तो लोग बाग माउथ फ्रेशनर का उपयोग करते ताकि प्याज की बदबू नही आए।किन्तु जब भाव बढे तब प्याज खरीद लिया वो सबसे ज्यादा धनवान।
प्याज के छिलके उतारने की कहावत अब महंगी हो गई थी ।प्याज लाते तो अब बच्चें आसपास इकट्ठे होकर बड़े खुश होते और जोर से मम्मी को आवाज लगाते।मम्मी देखों पापा प्याज लाए।घर मे उत्सव का माहौल बन जाने लगा ।प्याज की सब्जी लॉक डाउन में बहुत फेमश हो रही है।प्याज की घरों में इज्जत औऱ ओहदा बढ़ गया।कभी प्याज – आँगन ,छत पर धूप खाने इधर उधर बिखरे पड़े रहते थे।
कुछ लोग प्याज नही खाते यदि भूल से प्याज नही लाए तो पड़ोसी से मांग लेते थे।अब संक्रमण के दौर  में मांगने में झिझक होने लगी।जिस प्रकार बाढ़ के पानी का स्तर बढ़ता उसी प्रकार प्याज  का भाव भी बढ़ता जा रहा।प्याज कतरने पर आँसू आते थे।अब भाव सुनकर सब रोने लगे।कही ऐसा ना हो फ़िल्म निर्माताओ को पटकथा ना मिले तो ये प्याज की पटकथा तैयार कर प्याज पर फिल्मांकन कर प्रदर्शित कर सकते है।।दुसरो को स्टोरी सुनाने के साथ का आनंद भी बता सकते है।महंगे होने से घरों में बिन पूछे यदि प्याज उठा लिया तो ग्रह युद्ध छिड़ जाता था. भले ही आप कमाकर लाते हो ।हुकूमत तो पत्नी की ही चलती है। क्या वाकई जिंदगी प्याज बिना अधूरी है?शायद स्वाद के रसिको के स्वर एक साथ उठेंगे -हाँ भई हाँ।
प्याज ने नाक में दम कर रखा है। हर सब्जी प्याज बिना अधूरी ,गर्मी  खाना खाते समय मुक्के से प्याज फोड़कर कई लोग इसे खाने की कला बताते है। गर्मी में सेव परमल ,सुबह नाश्ते में पोहे के ऊपर कटे प्याज  अलग से डलवाना भी  लोग पसंद करते है। आजकल प्याज खालो सामने वालों को इसकी गंध भी नहीं आएगी क्योकि मुँह पर तो मास्क बंधा जो है।
लॉक डाउन में दूरी का पालन करने से मंचीय कार्यक्रम -कवि सम्मलेन , साहित्यिक और अन्य कार्यक्रम बंद है। हर कोई अपनी प्रतिभा घर में ही दिखा रहा है। मोबाइल पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन ,ज्ञानार्जन  की बातें शेयर की जा रही है। जब कवि की कविता सुनाने का मोबाइल पर  हिसाब से नंबर आया तो उनके कानों में बाहर ठेले वाला जिसके पास सब्जी बेचने का पास बना था वो  लॉक डाउन में आवाज लगा रहा था ।प्याज ले लों ,आलू सब्जी ले लों  ।.कवि की प्याज पर लिखी कविता का बाहर से और कवि की अंतरात्मा से जबरजस्त समर्थन मिल रहा था।बस वाह वाह नही निकल रही थी।क्योकि मुँह पर मास्क बंधा था।और माला भी दूरी की वजह से नही पहनाई जा रही थी।
संजय वर्मा’दृष्टि’
125,शहीद भगतसिंग मार्ग
मनावर(धार)

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