पढ़ लोगे- प्रमिला आर्य

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पढ़  लोगे

खिलेंगी बाग में कलियाँ चमन गुलजार पढ़ लोगे   13729109_1005088922923111_2735384595348893798_n

फजाओं के महकने का तभी आधार पढ़ लोगे

पलट कर देख लें जो जिन्दगी के कोरे पन्नों को

अधूरी ख्वाहिशों दर्द तुम हर बार पढ़ लोगे

करेंगे याद खुद्दारी -झुकाया सिर नहीं जिसने

कहानी शौर्य की वीरों की तुम तलवार पढ़ लोगे

बनी मैं नेह की बाती कभी तुमने नहीं जाना

उतर कर दिल में देखो तो हमारा प्यार पढ़ लोगे

बनी दो गज जमीं पर झोंपड़ी मुस्का रही पर कल

महल के झुग्गियों पर हो रहे हैं वार पढ़ लोगे

उड़ाने हौंसलों की हो अगर आकाश छू लो तुम

सुनहरे ख्वाब का तब तुम कोई आकार प-सजय़ लोगे

मिटायें देष दिल से हम जलें सद्भाव के दीपक

कलुषधुल के नवल उजियार प-सजय़ लोगे धुल

 

प्रमिला आर्य

4 जे -3 ,तलवंडी ,कोटा-328005( राज)

 

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