कइल धइल सभ अपने ह

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devendra kumar rai

बडी़ अरमान रहे उमकल अइनी,
छटकल गोड़ सोझे गड़हे में डइनी।
हाला के गाला में फंसि गइनी अपने,
देखावा के दलदल में धंसि गइनी अपने।
केहू के दोस ना अपने करनी के फल ह,
दुनिया के देखा-देखी कइल नकल ह।
अपने थूंकल थूंक अपने हम चटनी,
दोसरा के कब ले कहबि भतरकटनी।
हाय रे बिधना कइनी कवन सम चूक,
चौदहो बरीस में मिलल नाहीं सुख।
दरद देवेन्दर के ना बिधनो बतावेले,
देखीं आगे कइसन रहिया देखावेले।
(देवेन्द्र कुमार राय,ग्राम+पो०-जमुआँव, थान-पीरो, जिला-भोजपुर, बिहार,802159)

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