पर्पल पेन द्वारा “जश्न ए अल्फ़ाज़” का सफल आयोजन”

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संजय कुमार गिरि, नई दिल्ली।
साहित्यिक समूह पर्पल पेन के द्वितीय वार्षिक उत्सव ‘जश्न-ए-अल्फ़ाज़’ का शानदार आयोजन रविवार शाम हिंदी भवन में आयोजित किया गया । कार्यक्रम अध्यक्षता पंजाब शिरोमणि विश्व-विख्यात गज़लकार राजेंद्र नाथ रहबर ने की । आकाशवाणी के पूर्व महानिदेशक एवं प्रख्यात साहित्यकार श्री लक्ष्मीशंकर वाजपयी एवं मशहूर शायर मलिकज़ादा जावेद जी विशिष्ट अतिथि रहे । माँ शारदे के चित्र के सम्मुख अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित करने के उपरांत कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ !
कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों को मोतियों की माला एवं अंगवस्त्र पहनाकर व पुष्प गुच्छ भेंट कर संस्था की संस्थापिका वसुधा कनुप्रिया ने सम्मानित किया ।
समूह में विशेष सक्रियता एवं साहित्यिक योगदान के लिए सुश्री इंदिरा शर्मा, सुश्री नीलोफ़र नीलू और सुश्री वंदना गोयल जी को “साहित्य सेवी सम्मान” प्रदान किया गया। विभिन्न माध्यमों से साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिये श्री अशोक कश्यप (नवांकुर साहित्य सभा), श्री ओम प्रकाश शुक्ल जी (युवा उत्कर्ष मंच), श्री विजय दिवाकर (संपादक, विजय न्यूज़ व सनसनी), श्री सैफुद्दीन सैफ़ी ( संपादक, लोक जंग) व श्री दिनेश गोस्वामी, ( समाजसेवी ) को प्रदान किया गया।
सम्मान समारोह के उपरांत काव्य की अविरल गंगा बही जिसमें दिल्ली , गुरुग्राम, फरीदाबाद, राजस्थान, उत्तराखंड , उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा से आये लगभग 65 कवियों ने काव्यपाठ किया ।
उस्तादे मोहतरम राजेन्द्र नाथ रहबर ने अपनी गज़ल कुछ इस अंदाज़ में कही —-
“जब भी हमें मिलो ज़रा हंस कर मिला करो
देंगे फ़क़ीर तुम को दुआएं नई नई “
शायर मलिकज़ादा जावेद ने कुछ यूँ शेर कहा —
“वतन से जो नहीं करते मुहब्बत
दिमागी तौर पर बीमार होगें “
श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने अपनी सुन्दर कविता में पढ़ा —-
कमरे में सजी
तुम्हारी बड़ी सी
तस्वीर से
कहीं ज्यादा
परेशान करती हैं
बाथरूम में चिपकी
तुम्हारी छोटी-छोटी
बिन्दियाँ”
काव्य की लगभग रभी विधाओं में काव्य पाठ करके कवियों ने ख़ूब समां बाँधा ।
कार्यक्रम का संचालन कमल कांत शर्मा ने अपने लाजवाब अंदाज में किया। कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव में विशिष्ट अतिथियों द्वारा पर्पल पेन के शानदार दो वर्ष पूर्ण होने पर केक काट कर सभी का मुँह मीठा कराया गया ! सभी कवियों को उनके शानदार काव्य पाठ के लिए ‘शब्द शिल्पी सम्मान’ प्रदान किया गया ।
अंत में पर्पल पेन की संस्थापिका वसुधा कनुप्रिया ने सभी अतिथियों एवं कवियों के प्रति आभार व्यक्त किया ।

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