पर्पल पेन समूह द्वारा ‘जयतु भारत’ काव्य गोष्ठी का आयोजन 

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दिल्ली संवाददाता द्वारा (07 अगस्त): आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में दिल्ली के अग्रणी साहित्यिक समूह  र्पपल पेन द्वारा ‘जयतु भारत’ काव्य गोष्ठी का आयोजन प्रीत विहार (पूर्वी दिल्ली) स्थित गंधर्व वैलनेस स्टूडियो में सफलतापूर्वक किया गया। भारत माता के पूजन और पर्पल पेन समूह की संस्थापक-अध्यक्ष सुश्री वसुधा ‘कनुप्रिया’ के स्वागत वक्तव्य से इस कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ ।

आयोजन अध्यक्ष सुश्री मीनाक्षी भटनागर एवं विशिष्ट अतिथि श्री मनोज कामदेव सहित सर्व श्री/सुश्री सुषमा शैली, के. शंकर सौम्य, रेणुका सिंह, पुनीत सत्यम्, निधि भार्गव मानवी, दिनेश आनंद और पूजा ने देशभक्ति से ओतप्रोत रचनायें प्रस्तुत कीं। गोष्ठी का सुरुचिपूर्ण संचालन सुश्री गीता भाटिया ने किया।

सुश्री वसुधा ‘कनुप्रिया’ ने बताया कि पर्पल पेन समूह गत कई वर्षों से स्वतंत्रता दिवस पर फौजियों को राखियाँ भेज रहा है। पंद्रह अगस्त के दिन समूह की संस्थापक सहित कुछ पर्पल पेन सदस्य इंडिया गेट जा कर वहां घूमने आये नागरिकों और विदेशी सैलानियों को तिरंगे बैज पहनाते है, सब मिलकर भारत माता का जयकार करते हैं । राष्ट्रीय और अन्य पर्वों पर वसुधा ‘कनुप्रिया’ व्यक्तिगत रूप से गरीब बच्चों में भोजन, खिलौने, पुस्तकें आदि वितरित करती रही हैं।

‘जयतु भारत’ काव्य गोष्ठी में अनेकानेक छंद — दोहे, मुक्तक, पद, माहिया सहित गीत, ग़ज़ल और मुक्त छंद कविता भी सुनने को मिलीं। राष्ट्र भक्ति, सैनिकों, सामाजिक सरोकार के साथ-साथ मानवीय संवेदना, प्रेम, ममता को विषय बनाकर कविगण ने भावप्रवण कविताओं का सुन्दर पाठ किया।

सुश्री रजनी रामदेव ने अपने सरस पद में के माध्यम से बताया कि माँ भारती किस प्रकार अपने सपूतों को पुकार रही है —
“कड़ी लहू लुहान हो विक्षुब्ध मात भारती
निरीह मूक नैन से सपूत वो पुकारती”
“न अब महब्बत दिलों में बसती न दोस्त कोई मिले है सच्चा
 धरम में ,जाति में, बोलियों में ये देखो इंसानियत बटी है” — अपनी नज़्म के द्वारा वसुधा ‘कनुप्रिया’ ने अपना सरोकार रखा।
“शहीदों का लहू ख़ुद में बहा लो यारों
जश्ने-आज़ादी है ज़रा झूम के नाचो यारों” — सुश्री गीता भटिया ने सभी वीर जवानों और फौजियों को नमन करते हुए पढ़ा।
शहीदों संग उनके परिवार के बलिदान को भी याद करते हुए युवा कवि श्री पुनीत सत्यम ने कुछ यूँ  अपना भाव व्यक्त किया  —
“कितनी माँ की गोदें उजड़ी, कितनी सूनी मांग हुई
 रक्त बहा पानी सा डाला तब आज़ादी पाई है”
“कहीं कश्मीर की वादियाँ
 कहीं उत्तराखंड की घाटियाँ
 कहीं काशी की देवालय तो
कहीं वृंदावन की झाकियाँ”…. देश के सुन्दर भूगोल और संस्कृति से परिचय कराती एक रचना सुश्री रेणुका सिंह ने प्रस्तुत की।
“गंगा यनुमा नर्मदा, झेलम और चनाब
बन के जीवनदायिनी, बहती यहाँ जनाब” — विशिष्ट अतिथि श्री मनोज कामदेव ने विभिन्न रंगों और विषयों के दोहे  पढ़े।

सुश्री मीनाक्षी भटनागर ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कविगण की सार्थक रचनाओं को सराहा और आशा जताई कि आज की पीढ़ी भी अपने में देशभक्ति के भावना को प्रवाहित करे, राष्ट्र से जुड़े। उन्होंने इस सुंदरा रचना के साथ उम्मीद जताई की भारत सदैव मुस्कुराता रहे —
“किसी की आँख का सपना
सजेगा बन तेरा अपना,
जब पीर परायी अपनी होगी
खुशियां भी साझी होंगी,
मन तराने जब सुनाएगा
तब भारत मुस्कुराएगा”

उपस्थित कविगण ने देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस की सभी को बधाई देते हुए राष्ट्र के समक्ष प्रस्तुत चुनौतियों, देश की  उपलब्धियों, आदि पर अपने विचार रखे। रक्षा बंधन और मित्रता दिवस पर भी रचनायें पढ़ी गयीं।

सुश्री रजनी रामदेव के धन्यवाद ज्ञापन से ‘जयतु भारत’ गोष्ठी का समापन हुआ।
आज़ादी के अमृत महोत्सव के इस शुभ अवसर पर ‘गन्धर्व वेलनेस स्टूडियो’ की संस्थापक सुश्री ममता वर्मा की ओर से एक हज़ार रूपए के ‘गिफ्ट वाउचर’ सुश्री मधु और श्री गौतम शर्मा  ने पर्पल पेन काव्य गोष्ठी में काव्य पाठ करने वाले सभी कवि मित्रों को भेंट किये। पर्पल पेन संस्थापक सुश्री वसुधा कनुप्रिया ने आयोजन में सहभागिता के लिए स्टूडियो के समर्पित कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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