पर्पल पेन काव्य गोष्ठी ‘पारिजात’ का आयोजन

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नई दिल्ली — रविवार, 03 नवंबर 2019 को दिल्ली के प्रसिद्ध लोधी गार्डन में पर्पल पेन की संस्थापक वसुधा ‘कनुप्रिया’ द्वारा काव्य गोष्ठी ‘पारिजात’ का शानदार आयोजन किया गया जिसमें दिल्ली तथा एनसीआर से पधारे अनेक कवियों-कवयित्रियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई तथा श्रेष्ठ रचना पाठ कर हरे-भरे लोधी गार्डन को काव्य से सुवासित किया। सुबह प्रदूषण का स्तर काफ़ी बढ़ा हुआ था लेकिन दो बजते-बजते सूर्य देवता ने दर्शन दिये तो लगा मानो प्रकृति ने भी पर्पल पेन काव्य गोष्ठी को अपना आशीर्वाद दे दिया ।
धूप चढ़ने से मौसम साफ़ हो गया और देखते ही देखते सुमधुर एवं सरस काव्य पाठ सुनकर लोधी गार्डन में घूमते पर्यटक भी आस-पास एकत्रित हो गए । सभी ने मंत्रमुग्ध होकर काव्य पाठ का आनंद लिया। कई विदेशी सैलानियों ने तस्वीरें भी खींची और वीडियो रिकार्डिंग भी की । वे बड़े कौतूहल से यह नज़ारा देख रहे थे ।
पर्पल पेन ‘पारिजात’ गोष्ठी में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने वाले कवियों व कवयित्रियों में सर्व श्री/सुश्री श्री रजनी रामदेव, मीनाक्षी भटनागर, अंजु खरबंदा, डाॅ. अंजु लता सिंह, सुषमा शैली, ए एस ख़ान अली, जगदीश मीणा, विजय प्रशांत, अहमद अली बर्क़ी आज़मी, असलम बेताब, प्रेम सागर प्रेम, विवेक आस्तिक, जावेद अब्बासी, डाॅ. चंद्रमणि ब्रह्मदत्त, वीणा तँवर, सुनील शर्मा, अंजु मोटवाणी, आरिफ़ देहलवी, नसीम बेग़म एवं बबीता गर्ग ने लाजवाब काव्य पाठ किया ।
रजनी रामदेव जी ने समसामयिक विषय ‘प्रदूषण’ पर अपने विचार कविता में प्रस्तुत किये —
“जल, धरती, आकाश देखिये और पवन की ओर
फैल रहा चहुँ ओर प्रदूषण, आज बहुत घनघोर”
लेना साँस हुआ अब बोझिल, जीवन में ये कैसी मुश्किल
दानव बनकर खड़ा सामने, मिले न इसका छोर”
जगदीश मीणा ने अपने मुक्तक से ख़ूब तालियाँ बटोरी —
“कली ने पाँखुरी को खोल दिल का राज़ खोला है
रही मैं बेख़बर उसने मेरी रूह को टटोला है
भ्रमर सूरत से काला है सीरत से है भोला
उसी पगले दिवाने पर गुलाबी मन ये डोला है”
पर्पल पेन काव्य गोष्ठी में पहली बार शिरक़त करने वाली
अंजू मोटवानी ने पेश की दिल को सुकून देने वाली ये पंक्तियाँ —
“जो दिल को तस्सली दे वो बात ज़रूरी है
जीने के लिये माफ़िक हालात ज़रूरी है
जो बदले इंसा को इंसा की नीयत को
दरपन का सजग रहना हज़रात ज़रूरी है”
मीनाक्षी भटनागर ने प्रदूषित वातावरण पर अफ़सोस जताते हुए प्रकृति से यह निवेदन किया —
“टूटे सपने, छूटे अपने
भूली राहे, मंजिल बिसरी
उन भीगी-भीगी पलकों पर
सुपन सुनहरे सजा जाना
प्रिय बसंत तुम यूँ आना
प्रिय बसंत तुम यूँ आना”
असलम बेताब ने बेहद ख़ूबसूरत ग़ज़लें पढ़ कर श्रोताओं से वाहवाही पाई —
“मेरे कमरे मॆं रौशनी आई
आप आये तो जिंदगी आई
आप का नाम इस हथेली पर
लिखते-लिखते शायरी आई”
सुषमा शैली ने शरद ऋतु पर को विषय बनाकर कुछ यूँ कहा —
“उपहास उड़ाती आई शरद ऋतु निर्धन की नहीं सगी है
मनभावन लगे उसे ही शीत लहर जिसे नहीं लगी है वह”
अहमद अली बर्क़ी आज़मी ने मोहब्बत पर ग़ज़ल सुनाकर महफिल की रौनक़ में चार चाँद लगा दिए —
“तंग कर रहे हैं क्यों दायरा मोहब्बत का
आप ही को करना है फैसला मोहब्बत का
थाम ले मुझे आ कर गिर न जाऊँ मैं थक कर
कैसे तय करूँ तन्हा रास्ता मोहब्बत का”
अंजू खरबंदा ने ह्रदयस्पर्शी कविता ‘बेटियाँ’ प्रस्तुत की —
बुझते चिरागो को जो रोशन कर दे अंजुम
जीवन की ऐसी रूहानी लौ होती हैं बेटियाँ !
बच्चों को सार्थक संदेश देते हुए बबीता गर्ग ने कहा —
“गुस्से का तूफ़ान उठे जब ठंडा पानी पी लेना,
बुरा-भला कहने से पहले दस तक गिनती गिन लेना”
असलम जावेद ने बेहतरीन अशआर पढ़े —
“ख्वाब आँखों में बुन लिया मैंने
तुमको महबूब चुन लिया मैंने”
पर्पल पेन की संस्थापक एवं संचालक वसुधा ‘कनुप्रिया’ ने अपनी ग़ज़ल से सबको भाव विभोर कर दिया —
“आज रस्ते में मुझे फिर वो मिला अच्छा लगा
आज फिर एक गुले-इश्क़ खिला अच्छा लगा”
काव्य गोष्ठी का समापन करते हुए पर्पल पेन समूह की संस्थापक एवं संचालक वसुधा ‘कनुप्रिया’ ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।
फिर समूह फोटो का दौर चला । तत्पश्चात लोधी गार्डन के ख़ुशनुमा माहौल में सभी ने उत्साहपूर्वक तस्वीरें खिंचवाई, जलपान किया और एक ख़ूबसूरत काव्यमयी शाम की यादें मन में संजोये लौट चले ।
रिपोर्ट : अंजू खरबंदा एवं वसुधा ‘कनुप्रिया’

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