पुस्तक समीक्षा –“सॉफ्ट कॉर्नर”

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पुस्तक परिचय–“सॉफ्ट कॉर्नर”लेखक-राम नगीना मौर्य,रश्मि प्रकाशन,लखनऊ,पहला संस्करण-2019,सहयोग राशि-175रुपये।
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समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में राम नगीना मौर्य का नाम एक प्रतिष्ठित प्रयोगधर्मी कथाकार के रुप में है।उत्तर प्रदेश सचिवालय,लखनऊ में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत मौर्य जी,हिंदी कथा साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं।वर्तमान समय ही नहीं विगत दो-तीन दसक से हिंदी अध्यापक/प्राध्यापक से बेहतर लेखन गैर अकादमी जन कर रहे हैं।इससे पूर्व मौर्य जी की दो कहानी संग्रह यथा-आखिरी गेंद-2017,आप कैमरे की निगाह में हैं-2018 ।
डॉ.विद्यानिवास मिश्र पुरस्कार एवं यशपाल पुरस्कार से सम्मानित ।सॉफ्ट कॉर्नर,कथाकार की नवीनतम कथा-संग्रह है।जैसा कि कहानी -संग्रह का शीर्षक–सॉफ्ट कार्नर’है यह जिंदगी की मुलायम आवरण में लिपटी हुई पड़ते की पड़ताल करती है।हमारे रोजमरा की जिंदगी,किस्से,घटनाओं को मौर्य जी गल्प में रुपांतर करते हुए,रिश्तों के परते को खोलते नज़र आते हैं।
अपनी बात में मौर्य जी लिखते हैं–“मेरी नजर में भी साहित्य वही है जो सर्वसमावेशी नजरीये से आम जन की भाषा में उनसे सरल-सहज संवाद स्थापित कर सके।रचना की सार्थकता भी यही है कि वह मानवीय संवेदना,सामाजिक सरोकार से जुड़ी लगे।चार्ली चैपलीन का मानना था कि–”जिंदगी को क्लोज-अप’में देखोगों,तो यह सरासर ट्रैजेडी नजर आएगी।लॉन्ग-शॉट में देखोगे,तो यह कॉमेडी के सिवा कुछ भी नहीं।”देखी जाए तो सकारात्मक सोच,रचनात्मक कार्यों की तरह लिखना भी तनाव-प्रबन्धन सरीखे ही हैं।
सॉफ्ट कर्नर कहानी -संग्रह में कुल 11 कहानी है।पहला कहानी ‘बेवकूफ लड़का ‘जो घरेलू परिवेश की कहानी है।इस कहानी में नव -दम्पति के घर,पहली सन्तान पैदा होने की उल्लास,पत्नी लेबर-रुम में,पति बाहर बेंच पर बैठा,आने वाले बच्चे की प्रतीक्षा में पूर्व दीप्ति-प्रभाववश,अपने छोटे भाई-बहनों की पैदाइश को याद करते हुए,नॉस्टैल्जिया-भाव में जो कुछ भी सोचता है,उन्हीं को लेकर वर्तमान और अतीत के जद्दोजहद का चित्रण है।
छुट्टी का सदुपयोग -कहानी में दफ्तरी जिंदगी में छुट्टियों की महत्ता,उसके सदुपयोग को लेकर,शहरी मध्य-वर्ग की जीवन शैली,उनके जीवनानुभव से जुड़े छोटे-छोटे खट्टे-मीठे दैनन्दिन के हल्के-फुल्के प्रसंगों को पिरोते हुए प्लॉट तैयार किया गया है।–“छुट्टियों के संबंध में मेरी स्पष्ट राय है,बिना वाजिब कारणों के मैं छुट्टी नहीं लेता।काहे से कि घर में खाली बैठे-बैठे करुँगा भी क्या?बेवजह ही ऊबन सी होने लगेगी।वैसे भी विद्वजनों,बड़े-बूढ़ों का कहना है,’खाली दिमाग शैतान का घर होता है–।दफ़्तर में दस-बीस लोगों से मिलना-जुलना,तीन-चार लोगों के साथ चाय-पीना,काम-धाम,कुछ मीटिंग्स-सीटिंग्स,कुछ जरूरी फोन-कॉल्स या लंच-आवर में कलीग्स के संग गप्प-सड़ाका आदि।कार्य दिवसों में काम-धाम इत्यादि के बीच पूरा दिन कब बीत जाता है,पता ही नहीं चलता।बोरियत होने ही नहीं पाती।”(51)
‘ग्लोब’ कहानी जेनरेशन-गैप से जुड़ी कहानी है।साथ ही बाजारवाद,भूमंडलीकरण,तेजी से बदलते समय में जीवन की आपाधापी-भागमभाग के प्रभाव से हमारा जीवन इस कदर प्रभावित है कि जो इन संग सामंजस्य नहीं बिठा पाएगा,वो निश्चय ही पीछे रह जाएगा।प्रस्तुत कहानी में पिता-पुत्र के माध्यम से इसे दिखाया गया है–“दुनिया कहाँ -से – कहाँ पहुँच गयी और आप अभी अपने बाबा-पिता जी के जमाने के उसी ग्लोब में ही अटकते-भटकते फिर रहे हैं।वैश्वीकरण,भूमंडलीकरण,बाजारीकरण का माहौल चतुर्दिक पसरा हुआ है।फिजूल-सी आशंकाए मत पालिए।ऐसी किन्हीं परेशानियों को खुद पर हावी मत होने दिया कीजिए।उन्हें दिल पर लेने के बजाय लाइटली लीजिए।कौन नहीं परेशान है?बड़े-बड़े देश परेशान है।आपकी बिसात ही क्या है?’टेक इट ईजी एण्ड रिलेक्स–।—ज्ञानवर्धन के लिए ज्यादा पढ़ने-लिखने के बजाय बाबा की शरण में जाइए,तभी उद्धार होगा’पत्नी ने भी बेटे के पक्ष में लेक्चर झाड़ते अपनी ही स्टाइल में व्यवस्था दी।–बताता चलूँ ,हम पति-पत्नी बेटे को प्यार से बाबा कहकर ही पुकारते हैं।”(90-91)
संग्रह की अंतिम कहानी है -सॉफ्ट -कार्नर है,जो  हर प्रायःहर दम्पति शादी से पहले की औपचारिकताओं के दौरान कर चुके होते हैं।यहाँ पर उन्हीं प्रसंगों का सुंदर चित्रण है।–“आप दिनभर दफ़्तर में काम-काज के बाद,थकते नहीं क्या,जो घर आते ही लिखने-पढ़ने की सनक सवार हो जाती है?मेरा ध्यान डायवर्ट मत करो,मैं जो पूछ रहा हूँ,उसे बताओं।मेरे एबसेन्स में मेरे कमरे में कौन आया था?(117-118)
“हर कविता-कहानी-उपन्यास की अपनी पृष्ठभूमि-कथाभूमि-भावभूमि होती है।पता नहीं कब,कौन सा धड़ाम-धकेल आइडिया दिमाग में क्लिक कर जाये?ये कोई दाल-भात का कौर नहीं कि थाली सामने आयी और गप्प से लील लिया।’
दाल-भात बनाना भी कोई खिलवाड़ नहीं हैं।आप तो ढंग की खिचड़ी भी नहीं बना पाते।सिवाये चाय-कॉफी बनाने के आपको आता ही क्या है?(118)
इस तरह भाषा और संवाद शैली के साथ कथा का प्लाट भी चयन करने में मौर्य जी सार्थक है।
हिंदी कहानी को नयी आयाम देने हेतु मौर्य जी को साधुवाद।
【समीक्षक-डॉ.रणजीत कुमार सिन्हा,मिदनापुर कॉलेज,पश्चिम मिदनापुर।】

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