राही के प्रेम पुष्प -राजेश जैन राही

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राही के प्रेम पुष्प

1. नगदी संकट में घिरी, खातों का उपवास। rahi popular

चक्रव्यूह में आम हैं, चक्के पर हैं खास।।

2. खत कोई लिखता नहीं, खारिज हैं अहसास।

मिलने की फुरसत कहाँ, फोन रखा है पास।।

3. पुरवाई है लापता, कोयलिया खामोश।

बिन तेरे प्रियतम उड़े, मौसम के भी होश।।

4. बनो भोर की लालिमा, भरो सांझ में रंग।

प्रियतम जीवन को करो, आकर तुम नवरंग।।

5. खुशबू सी मुझमें बसो, जीवन बने बहार।

शर्तों के आधार पर, नहीं टिकेगा प्यार।।

6. बंधन में बेबस हुए, प्रीत भरे अधिकार।

सपनों में पाती पढ़े, बाँचे मन मनुहार।।

7. गंगा जैसी पाक है, कान्हा तेरी प्रीत।

कंस कभी समझे नहीं, राधा जी के गीत।।

8. दुर्गे हे माँ तारिणी, दे  जग को वरदान।

सत्य न्याय की जीत हो, हारे बेईमान।।

9. उपदेशक काफी मिलें, शुभ-चिंतक दो चार।

कोशिश की कूची गढ़े, आलोचक की हार।।

10. पीड़ा भरकर लेखनी, लिक्खी कविता एक।

आलोचक व्याख्या करें, मतलब कहें अनेक।।

 

राजेश जैन राही
आइ -1, राजीव नगर, रायपुर (छ.ग.)

 

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