दोहे रक्षा बंधन पर …

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उत्साहित है हर नगर ,शहर गली बाजार !  ramesh sharma
रक्षा बंधन का पुनित, आया है त्यौहार !!

फीका फीका सा लगे,   राखी का त्यौहार !
जी अस टी के साथ मे,आया जो इस बार !!

बहना का तो प्यार है,भाई का विश्वास !
राखी की इस डोर में,रिश्तों का अहसास !!

राखी का त्योहार है,,,,सजने लगी दुकान !
हर बहना के हाथ में, दिखता है मिष्ठान !!

कन्या भ्रूण का कोख में, करते है सँहार !
खतरे में लगने लगा,बहनों का त्यौहार !!

हो जाता है कोख में, कन्या भ्रूण सँहार !
कैसे होगी भावना, राखी की साकार !!

कन्याओं के साथ में, किया हुआ खिलवाड़ !
दुनिया को ही एक दिन , देगा सकल उजाड़ !!

बेटे को इज्जत मिले, बेटी को दुत्कार !
रक्षाबंधन का वहां,रहा नहीं फिर सार !!
रमेश शर्मा..

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