रंजना जी का सामाजिक सरोकार : सबको सीखने की जरूरत

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डॉ. कैलाश कुमार मिश्र

ये जो पुरुष है ना ये दम्भ में रहता है। बड़ी बातें करना इनसे सीखिए। स्वच्छ भारत अभियान में आयरन किया हुआ दुग्ध धवल कुर्ता पायजामा अथवा धोती या अन्य वस्त्र धारण कर रिचुअल पूरा करने के लिए या फिर मोदी जी को प्रसन्न करने के लिये हाथ मे झाड़ू लेकर साफ सुथड़े जगह में ही झाड़ू लगाने लगते हैं श्रीमान। कहिये ना, आप ने भी देखा होगा! और फिर यथार्थ में यत्र-तत्र-सर्वत्र गन्दगी फैलाने का काम।
ये पुरुष जो है ना ये महाशय बीड़ी, तम्बाकू, गुटका, सिगरेट , पान आदि के कुल खपत का 85 प्रतिशत से भी ऊपर चटक जाते हैं। फिर क्या करते हैं? थूक, खखाड़, पिक, बचे हिस्से को यत्र तत्र बिना किसी अनुशासन के फेकना, धुएँ के गन्ध से पर्यावरण को प्रदुषित करना। रुकिए, श्रीमान यहीं नही रुकते। जहां मन हुआ खड़े खड़े मूत्रक्रिया का निष्पादन कर लेते हैं। पुरुष हैं ना, लाज किस बात का!received_1387258678062010
हमारी महिलाये इसके विपरीत एक आदर्श हैं। बोलती नहीं। प्रदर्शन नहीं करती कर्म से परिवर्तन करती हैं।
इसका सर्वोत्तम उदाहरण देखने को मिला भारतीय जनता पार्टी के महिला प्रकोष्ठ के सदस्यों के समागम में दिल्ली में। अपनी Ranjana Jha जो एक पढ़ी लिखी, समझदार महिला हैं। एक साकांक्ष नागरिक हैं , साफल साहित्यकार हैं। पत्रकारिता के धर्म को भी समझती हैं। पारिवारिक उत्तरदायित्वों का पालन करना भी कोई इनसे सीखे। रंजना जी ने एक साल पहले अपने भाई को अपना एक किडनी देकर आदर्श उपस्थित करते हुए जान बचाई थी।
17 अगस्त के सम्मेलन में रंजना जी को प्रधानमंत्री मोदी जी का स्वच्छ भारत अभियान स्मरण था। उन्होंने प्रण लिया कि जितना भी बोतल, ग्लास, कागज़ या किसी प्रकार का कचड़ा होगा सभी को सभा स्थल से हटा कर उस स्थान को साफ और स्वच्छ करके ही घर जाएंगे। रंजना जी ने एक एक कचड़े को चुनकर उसे निर्धारित जगह में डालकर अपने दायित्व का पालन किया । यह बहुत #बड़ी_छोटी बात है ।
हमे इन अति महत्वपूर्ण उदाहरणों से सीखने की जरूरत है। स्वच्छ भारत एक भाव है, एक यथार्थ है, यह रश्म अदायगी नहीं है।
रंजना जी के जज्बे को सलाम….

 

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