राष्ट्रीय अणुव्रत साहित्यकार सम्मेलन…

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अणुव्रत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय
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9 जुलाई 2017-दिल्ली-09 से 05 बजे तक एनडीएमसी कन्वेशन सेंटर, नई दिल्ली में एक दिवसीय” राष्ट्रीय अणुव्रत साहित्यकार सम्मेलन” आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय वित्तराज्य मन्त्री श्री अर्जुनराम मेघवाल ने किया। उन्होंने कहा कि विश्व शान्ति के लिए अणुव्रत का प्रयास अद्वितीय है। विशेष अतिथि डॉ. बलदेव भाई शर्मा (चेयरमेन, नेशनल बुक ट्रस्ट) ने कहा कि अणुव्रत दर्शन‘विश्व मानव’ का प्रतिफलित देता है । डॉ. वेदप्रताप वैदिक (अध्यक्ष-भारतीय भाषा सम्मेलन एवं विदेश नीति परिषद) ने अध्यक्षता की ,दीप प्रज्जवल श्रीमति अमिता चौरड़िया ने किया। मुख्य वक्ता डॉ. महेन्द्र कर्णविर के अणुव्रत विशषय व्यक्तव्य की उपस्थित साहितयकारों में बहुत अच्छी प्रभावना रही। अतिथियों का स्वागत आयोजक संस्था-अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र जैन एडवोकेट तथा आभार महामन्त्री अरुण संचेती एवं डॉ. कुसुम लुणिया ने किया।
इस अवसर पर प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ. कुसुम लुनिया की बहुचर्चित पुस्तक ‘सीक्रेटस ऑफ हेल्थ-द वेजीटेरियन’ वे एवं ‘अणुव्रतः एक संकल्प’ डोक्यूमेन्ट्री का लोकार्पण हुआ।
पांच सत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम के प्रथम वैचारिक सत्र का विषय ‘स्वर्णिम भारत एवं अणुव्रत’ में साहित्यकारों की भूमिका -की अध्यक्षता प्रो. पूरनचन्द टण्डन, बीज व्यक्तव्य प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित, (प्रतिष्ठित समालोचक एवं चिन्तक)कानपुर वक्ता प्रो. जयप्रकाश शर्मा, (अध्यक्ष हिन्दी विभाग चडीगढ़ विश्वविद्यालय, )डॉ. पीसी जैन सुप्रसिद्ध शिक्षाविद, महेन्द्र जैन-(पूर्व अणुव्रत सम्पादक )एवं संचालनश्री शान्ति पटावरी कार्यालय प्रभारी ने किया।
द्वितीय सत्र का विषय था ‘विश्वशान्ति और अणुव्रत’ इसमें अध्यक्षता तेजकरण सुराणा, वक्तव्य डॉ. कुमुद शर्मा (अध्यक्ष हिन्दी विभाग डीयू) डॉ नरेन्द्र शर्मा कुसुम एवं संचालन बाबूलाल दुगड़ (संयोजक )का रहा।
दोनों वैचारिक सत्र के चिन्तन मनन से निकला नवनीत था कि साहित्य समाज को दिशा प्रदान करता है। साहित्यकार की समाज के प्रति बहुत बड़ी जवाबदेही है। अणुव्रत के शाश्वत तत्वों का समावेश कर त्रैकालिक साहित्य का लेखन साहित्यकार कर सकते हैं।
अणुव्रत गीत का संगान श्री मनोज नाहर, जयसिंह दुगड़, राहुल बैद एवं श्री शान्तिकुमार जैन ने किया।
चतुर्थ संवाद सत्र के मुख्य अतिथि पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा, अध्यक्षता श्रीमती किरण चोपड़ा, चेयरपर्सन केसरी क्लब, वक्ता श्री बनेचन्द मालू, श्री गजेन्द्र सोलंकी, श्रीमती कीर्ति काले थे। अन्य विशिष्ट प्रतिभागियों ने भी इस समय शानदार प्रस्तुतियां इस सत्र का संचालन श्री रमेश बंसल ने किया।
अंतिम सम्मान सत्रा के मुख्य अतिथि माननीय श्री विजय गोयल, युवा एवं खेल मन्त्री भारत सरकार थे-उन्होंने अणुव्रत साहित्य को युवापीढ़ी के लिए अति आवश्यक बताया एवं कहा कि मानवीय प्रधानमन्त्री मोदी जी अणुव्रत के सिद्धांतों को ही देश हित में उपयोग कर रहे हैं। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. रामशरण गौड़ अध्यक्ष दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी ने की। इसमें विशिष्ट व्यक्तियों का सम्मान किया जिसमें प्रमुख है डॉ. देवेन्द्र आरय -पूर्वाध्यक्ष इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती, महेश शर्मा अध्यक्ष-दिल्ली हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रभात कुमार निदेशक प्रभात प्रकाशन, संगीता सिन्हा-संपादक-पांचवां स्तम्भ, श्री पुखराज सेठिया-संपादक अछूते संदर्भ , , श्री बनेचन्द मालू, वरिष्ठ काव्यकार श्री सुखराज सेठिया-अध्यक्ष अमृतवाणी, श्री राजेश जैन-निर्देशक पारस, श्री नरेश कुमार चैयरमेन एनडीएमसी, श्री दिनेश शर्मा-गौरव बुक्स एवं चायवाला साहित्य।
दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी , इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती ,प्रभात प्रकाशन  ,राज कमल .परकाशन गौरव बुर्कस तथा भारतीय अनुवाद परिषदंआदि  संस्थाओकी सहभागिता बुद्धिजीवियों ,शाैध एवं साहित्य विधारथियो का इस कार्यक्रम में सम्मिलन-विचार विमर्श-केन्द्रीय नेताओं का संरक्षण एवं मजें हुए वक्ताओं का मार्गदर्शन निश्चित रूप से अणुव्रत के इतिहास में नये पन्नों का सृजन करेगा।

 

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