करते -करते रोज तमाशा

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करते -करते रोज तमाशा
बड़ा तमाशा हो जाएगा
 मैं चल दूँगी खाट खड़ी कर
बड़ा हादसा हो जाएगा
जब  मेरी सांसें चल देंगी
ठाठ पड़ा  सा रह जायेगा
गल जल कर यादें बह लेंगी
घाट खड़ा सा हो जाएगा
रोज बजेंगे गीत ये मेरे
बचन कहेंगे प्यारे- प्यारे
बची अस्थियाँ नहा लेगी जब
जश्न बड़ा सा हो जाएगा
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
ये मिट्टी कुछ न पूछेगी
 राख मेरी ले फिजा  उड़ेगी
नाम  हवा सा हो जाएगा

डॉ पुष्पलता

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