साल पुराना था

0
54

खट्टी-मीठी यादों का वह,केवल एक खजाना था ।
कभी हँसाने,कभी रुलाने वाला साल पुराना था ।।

कभी पिता बनकर दुलराया, माता बनकर पाला भी ।
गुरुवाणी सम राह दिखाया, बना कभी वह हाला भी ।
माना जीवन बहुत कठिन पर, उससे भी याराना था ।
खट्टी-मीठी यादों का वह,केवल एक खजाना था।
कभी हँसाने,कभी रुलाने वाला साल पुराना था ।।

जी एस टी के सँग तलाक का, मुद्दा भी गरमाया था ।
माता  ने  अपने  बेटे  को, खुद सेहरा  पहनाया  था ।
पार्टी का यह चलन पुराना, रूप बदलकर आना था ।
खट्टी-मीठी यादों का वह,केवल एक खजाना था।
कभी हँसाने,कभी रुलाने वाला साल पुराना था ।।

कश्मीरी   वादी   में  फिर  से , नफ़रत के  अंगारे  थे ।
साँप – सपोले   आतंकी   फिर, देशभक्त  से  हारे थे ।
गद्दारों    का    पाकिस्तानी, टूटा  राग   तराना   था ।
खट्टी-मीठी यादों का वह,केवल एक खजाना था।
कभी हँसाने,कभी रुलाने वाला साल पुराना था ।।

वेंकय्या, कोविंद  देश के, प्रथम नागरिक  बन  आए ।
मोदी – योगी  मिल  करके फिर, भगवा  झंडे  लहराए ।
पुन: गरीबी  हार  गई थी, जनगण मन भटकाना  था ।
खट्टी-मीठी यादों का वह,केवल एक खजाना था ।
कभी हँसाने,कभी रुलाने वाला वर्ष पुराना था ।।

गौ  माता  खूँटे  पर  मरती, खड़े  कसाई   हँसते   थे ।
रक्षा  का यह   देख  छलावा, छली व्यंग  से डँसते  थे ।
लोकतन्त्र  में  मतदाता  को, लॉलीपॉप  चटाना  था ।
खट्टी-मीठी यादों का वह,केवल एक खजाना था ।
कभी हँसाने,कभी रुलाने वाला साल पुराना था ।।

भूमिपुत्र  की  दशा  न  सुधरी, रोजगार केवल  सपना ।
महँगाई   आपे  से  बाहर, बाहर कुलभूषण  अपना ।
जौहर को अपमानित कर,संजय को माल कमाना था ।
खट्टी-मीठी यादों का वह,केवल एक खजाना था।
कभी हँसाने,कभी रुलाने वाला साल पुराना था ।।

कुछ विकास के दावे सच थे, कुछ कोरे लफ्फाजी थे ।
मर्यादा   को   हरने  वाले, बाबा  फॉदर  काजी    थे ।
भेद  नहीं  शिक्षा – भिक्षा में, बदला नहीं जमाना था ।
खट्टी-मीठी यादों का वह,केवल एक खजाना था।
कभी हँसाने,कभी रुलाने वाला साल पुराना था ।।

बेटी  अब  भी  मारी  जाती, बहुएँ जलतीं  आगों  में ।
बदले  केवल  नाम  पुराने, कमी नहीं  कुछ  दागों  में ।
अच्छे  दिन के  इंतज़ार  में, सत्रह हुआ  रवाना  था ।
खट्टी-मीठी यादों का वह,केवल एक खजाना था।
कभी हँसाने,कभी रुलाने वाला साल पुराना था ।।

अवधेश कुमार ‘अवध’

LEAVE A REPLY