सगरो रंग घोराईल बा

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जेने तेने सभ केहु चलता पराईल
फागुन में रंग लागे सगरो घोराईल ।
केहु गावे फाग राग केहु गावे होरी
बईठल दुआरी देखे धनी लरकोरी।
ओटा से रंग देखीं सभ केहु फेंके
भऊजी के बहीनी खीरीकी से देखे।
बाबावा के धोती धंगाईल बा खोरी में
सउंसे रंगाईल देंहि अबकी बे होरी में ।
बोकवा के चढ़ल बा फगुआ के रंग
गुलाबी के रंग में रंगाईल अंगे अंग।
लागेला भईया ताके दोसरा दुआरी
भऊजी प हीक भ ताकेला पूजारी।
फागुन में फरकत खुब ईहो छउके
फगुआ में फानत बुढ़वो लोग लउके।
देवेन्द्र कुमार राय

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