संत रविदास जी का जीवन दर्शन

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२ फरवरी , २०१८ नई दिल्ली इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती ,दिल्ली के उत्तरी विभाग द्वारा संत रविदास जी की जयन्ती के उपलक्ष्य में “संत रविदास जी का जीवन दर्शन “ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया | उत्तरी दिल्ली नगर निगम सेक्टर ५ रोहिणी के प्रांगण में यह कार्यक्रम सम्पन्न हुआ |
कार्यक्रम का प्रारम्भ राष्ट्रीय कवि श्री जय सिंह आर्य जी ने अपनी कविता से किया | श्रीमती पूनम मटिया जी ने मुख्य अतिथि श्रीमती कनिका जैन जी का स्वागत किया | श्रीमती नीलम राठी जी ने अध्यक्षता कर रहे मुन्ना लाल जैन जी का स्वागत किया |
कार्यक्रम में संत प्रेमदास जस्सल ने संत रविदास के जन जागरण अभियान पर प्रकाश डाला | भारत की पराधीन जनता को जाग्रति का सन्देश देते हुए कहा “ पराधीनता पाप है, समुझि ले ओ मीत “
संत रविदास ने समता और सोहार्द का संदेश दिया | हम एक साथ मिलकर ही देश में समता और समरसता का प्रचार का सकते है |
डॉ. वेद प्रकाश ने विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा की संतो का समय और समाज अराजकता का समय था | ऐसे समय में संतो ने घर घर जाकर समाज जाग्रति का कार्य किया |समाज आपसी विस्वास से आगे बढ़ सकता है | बंटकर विकास संभव नहीं है | संत रैदास ने साम्प्रदायिकता मुक्त समाज के निर्माण पर प्रकाश डाला | जीवन की निरंतरता का साहित्य है संत साहित्य | इस अवसर पर रविदास जी के अनुयायियों का सम्मान किया गया |
संगठन मंत्री श्री प्रवीन आर्य जी ने कहा की हम सभी को मिल कर रहना चाहिए ये ही संत रविदास जी का और कबीर जा संदेश भी है |
मुख्य अतिथि के रूप में उत्तरी दिल्ली नगर निगम वार्ड समिति की उपाध्यक्ष श्रीमती कनिका जैन ने सभा को सम्बोधित किया | संत रविदास जाति पांति के घोर विरोधी और मानवता के अग्रदूत थे | आपने कहा की हमारे पाठयक्रमो में से संत एकाएक गायब होते जा रहे है | यदि आदर्श समाज की स्थापना करनी है तो संत साहित्य का अधिक प्रचार प्रसार करना होगा |
कार्यक्रम के अध्यक्ष जिला उत्तरी विभाग के अध्यक्ष श्री मुन्नालाल जैन ने अपने उद्बोधन में कहा इस समाज की प्रगति का मुख्य आधार है वाल्मीकि समुदाय | खटीक समुदाय तथा रैदासी सम्प्रदाय का यह समाज ऋण नहीं चूका सकता | जिन्होंने भारतीय समाज को संस्कृति को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई |
मनोज शर्मा महामंत्री ने कहा की संत कभी किसी एक जाति और पंथ का नहीं होता वो पूरे समाज का होता है | वो प्रभु के बताये हुए रस्ते पर चलने का सन्देश लेकर आते है | उन्हें किसी सीमा में बाँधना स्वयं को बाँधने जैसे होता है |
कार्यक्रम के अंत में श्री नृत्य गोपाल शर्मा जी संयोजक जी आये हुए सभी आगंतुको का धन्यवाद किया |
कार्यक्रम में श्री नत्थी लग भगेल जी , श्री जी पी शर्मा जी ,प्रमुख रूप से उपस्थित रहे |

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