सरस्वती वंदना

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मां शारदे तुम जब से मेरी सखी बनी हो
प्रकाश से मां मेरे ह्रदय को भर रही हो
घिरी थी अंधकार में तुमने किया उजाला
ज्ञान का प्रकाश मां मेरे ह्रदय में डाला
साथ-साथ मां तुम अब मेरे चल रही हो
प्रकाश से मां मेरे ह्रदय को भर रही हो
करती हो तुम कृपा निर्मल मन पे माता
रखती हो दूर उससे फैला हुआ कुहासा
भक्तों की आज अपने हर पीड़ा हर रही हो
प्रकाश से मां मेरे ह्रदय को भर रही हो
करना कृपा मां सब पर अर्ज है हमारी
झोली सब की भरना जो शरण हैं तुम्हारी
अज्ञानी को मां तुम ही ज्ञानी बना रही हो
प्रकाश से मां मेरे ह्रदय को भर रही हो
मां शारदे तुम जब से मेरी सखी बनी हो
प्रकाश से मां मेरे ह्रदय को भर रही हो
✍?नाम-दीपा संजय”*दीप*

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