प्रद्युम्न हत्याकांड पर सुलगते सवाल अधूरे जवाब

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गुरुग्राम के रेयान स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की हत्या का मामला आज पूरे देश में चर्चा एवं रोष का विषय बना हुआ है। रेयान स्कूल गुरुग्राम के नामीगिरामी स्कूलों में से एक है। इस स्कूल में हुई इस हत्या से पूरा देश हिला हुआ और अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक डर कायम हो गया है जो कि स्वाभाविक है। इस मामले पर प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। एक तरफ जहां सरकार निष्पक्ष जांच करवाने की कह रही है वहीं दूसरी तरफ बच्चे के माता पिता सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। इस मामले में सरकार द्वारा गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। मीडिया में आई जांच कमेटी की रिपोर्ट, पुलिस के बयान, माता पिता के बयान, कंडक्टर एवं उसके परिवार वालों के बयानों से कई सवाल उठ रहे हैं और उन सवालों के आधार पर यह मामला सुलझने की बजाए और उलझता नजर आ रहा है। मीडिया में आये बयानों और उन बयानों से पैदा हुए सवालों पर गौर कीजियेगा
बच्चे के माता पिता : हमारा बच्चा कभी बस से नहीं गया, हम ही छोड़कर आते और लाते थे बच्चे को, उस दिन भी 7:50 पर बच्चे को स्कूल गेट पर छोड़ा और बच्चे के क्लासरूम तक गुड़िया साथ थी इतना ही नहीं बाथरूम और क्लासरूम का रास्ता 30 सेकंड का ही है। आठ बजे को स्कूल के टीचर्स को बच्चा बाथरूम में मिला और 8:10 पर उन्हें फोन करके कहा गया कि आपके बच्चे को चोट लग गयी है।
कंडक्टर : मैं गलत काम कर रहा था, बच्चे ने देख लिया और डर गया। इसी डर में बच्चे को मार दिया पर बच्चे के साथ कुछ गलत नहीं किया। जब उससे पूछा गया चाकू कहाँ से लाया तो बोला कि कई दिनों से चाकू जंग लगा हुआ बस में पड़ा था और उसे साफ करने के लिए बाथरूम में गया था ताकि उसे साफ करके घर ले जा सकूँ। हत्या करने के बाद कहाँ भाग गए थे ये पूछने पर बोला कि कहीं नहीं गया स्कूल में ही था।
कंडक्टर के परिवार वाले : स्कूल वाले दबाव बना रहे हैं या पुलिस की पिटाई से डर कर हां भर रहा है वो वरना हमारा बेटा ऐसा नहीं कर सकता।
पुलिस : कंडक्टर ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। सीसीटीवी की फुटेज के अनुसार कंडक्टर भागता हुआ नजर आया। हमने वो चाकू भी बरामद कर लिया है जिससे हत्या हुई।
जांच कमेटी की रिपोर्ट : स्कूल में अनेक खामियां मिली हैं। टीचर्स और विद्यार्थियों के लिए अलग बाथरूम की सुविधा नहीं है। स्कूल की पीछे की दीवार भी टूटी हुई है। हर जगह सुरक्षा के मद्देनजर सीसीटीवी कैमरे भी नहीं हैं।
मीडिया में आये इन बयानों के बाद कई सवाल उठ रहे हैं जिनके जवाब जानने को हर कोई उत्सुक है। इन सवालों के कारण ही यह मामला उलझता हुआ नजर आ रहा है और प्रशासन की लापरवाही को भी बखूबी दिखा रहा है।
वो सवाल हैं :
1. कंडक्टर के अनुसार चाकू जंग लगा हुआ पुराना सा था, पुलिस द्वारा मीडिया में दिखाया गया चाकू नया है।
दोनों में कौन सच्चा और कौन झूठा है?
2. हत्या करते वक़्त कंडक्टर के कपड़ों पर भी खून लगा होगा, वो कपड़े कहाँ हैं?
स्कूल में खून लगे कपड़े किसी ने नहीं देखे क्या?
यदि उसने कपड़े बदल लिए तो वो कपड़े कहाँ से लेकर आया? यदि पहले से लाया था तो क्या हर रोज लाता था?
यदि उसी रोज लाया था तो उसका मकसद क्या था?
3. पुलिस कह रही है वो सीसीटीवी में भागता नजर आया जबकि कंडक्टर कह रहा है कि वो वहीं था।
दोनों में कौन सच्चा है और कौन झूठा है?
4.कंडक्टर कह रहा है कि मैं गलत काम रहा था और बच्चे ने देख लिया।
वो गलत काम क्या था जिसके देख लेने से ही प्रद्युम्न की हत्या कर दी?
5. जांच समिति कहती है कि स्कूल की पीछे वाली दीवार टूटी हुई है, जब कि स्कूल गुरुग्राम का नामी स्कूल है वो ऐसी हालत में स्कूल बिल्डिंग को कैसे रहने दे सकता है?
6. सबसे बड़ा सवाल है बच्चों और टीचर्स के लिए अलग अलग टॉयलेट्स का नहीं होना, इतने बड़े स्कूल में जहाँ 12वीं कक्षा तक लड़कियां भी हैं अलग अलग टॉयलेट्स का नहीं होने का मतलब है बच्चियों के इस्तेमाल के दौरान वहां कोई पुरुष कर्मचारी, टीचर्स भी पहुँच सकता है। इतनी बड़ी लापरवाही का कारण क्या है?
इन चंद सवालों के अलावा भी और भी सवाल हैं जिनके जवाब जानने को पूरा देश बेताब है।
लेकिन प्रद्युम्न की हत्या से स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को उठे सवाल को लेकर अकेले स्कूलों को कठघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता है। इसके लिए सरकार, स्कूल प्रबंधन और अभिभावक स्वंय दोषी हैं। जब से शिक्षा का व्यापार होने लगा है तब से हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। अभिभावक सिर्फ ऊँचे नाम के पीछे भाग रहे हैं, स्कूल प्रबंधन केवल पैसे के पीछे भाग रहा है और सरकार को किसी बात की चिंता नहीं है। सरकार कोई भी हो हादसे के बाद लीपापोती में लग जाती है, अभिभावक भी कुछ दिन हो हल्ला करके शांत हो जाते हैं और फिर वही व्यापारीकरण शुरू हो जाता है। इस व्यापारीकरण के नतीजे धीरे धीरे सबके सामने आने लगे हैं। अब इस दिशा में सरकार और अभिभावकों को कुछ कठोर कदम उठाने ही होंगे ताकि भविष्य में कोई और प्रद्युम्न इस तरह अपने माँ बाप से ना बिछड़े। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में सकारात्मक रुख अपनाते हुए एक बार फिर से साबित कर दिया है कि देश में कानून से ऊपर कोई नहीं है।
विशेष : ये सारा विश्लेषण प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की खबरों से किया गया है।
डॉ सुलक्षणा
कवयित्री एवं समाजसेवी

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