करुणा के सागर “तरुणसागर”

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धन्य हुई जननी – धरा तुम्हें पाकर
करुणा का  सागर थें  तरुणसागर ।
मोह छोड़ चल दिया  दिंगबर पथ
भरने जन-जन की गागर में सागर ।।

गूंजित था जन-जन,धरती – अंबर
सुनकर इनके कडवे प्रवचन प्रखर ।
निर्भीक होकर सत्य का दिया मंत्र
हो गई  इनकी  अटल वाणी अमर ।।

महावीर के संदेश का किया प्रचार
बदला जीवन,बदलें आचार-विचार ।
बनी इनकी सूक्तियां,मंत्र मार्गदर्शक
कर रहा आज नमन इन्हें सारा संसार ।।

हर्षित  होगे देव भी स्वर्ग में पाकर
धरा से आया है मानव को तारकर ।
संग लाया है सागर – सी  गंभीरता
आया आज ऐसा रत्न तरुणसागर ।।

           गोपाल कौशल
नागदा जिला धार मध्यप्रदेश

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