तुम रहना- डॉ पुष्पलता

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दही में धतूरा खिलाकर   18119103_1144730058972047_3327077530854154373_n
फिर कहा था
मरणासन स्त्री से
देवी बनेगी
पूजा होगी
नहीं बढ़ी थी वह
धकेली जाने लगी थी
पूर्वजों की तरह
तब
जयकारों में दबती
चीखों को सुनकर
भीड़ चीरता हुआ
बढ़ा  था एक दिव्य पुरुष
और खींच लिया  था बढ़ाकर हाथ
अंगारों में धकेले जाने से पहले
नारियल वाले हाथ
 मारने बढ़े थे उसे
मगर वह जानता था
अपनी सुरक्षा करना भी
उसकी माँ ने कहा था
अधर्म मत कर
वह बोला  थाअधर्म के पक्ष में
आप खड़ी हो माँ
कौन है तेरी
पूछा था माँ ने
कुछ नहीं उसने कहा था
मगर जलेगी नहीं ये
जियेगी
मौत से बदतर?
पूछा था माँ ने
नहीं मौत से बेहतर
बोला था दिव्य पुरुष
स्त्री खड़ी थी राहत लिए
उपकृत हुई
सर झुकाए
अपने देवता के सम्मुख
स्त्री जी मृत्यु के बाद भी
उसने कहा
धन्य थे तुम
तुम्हारी वजह से जी रही हूँ
मौत से बेहतर
तुम रहना आस पास
सदा सर्वदा
मेरे देवता
मेरे दिव्य पुरुष
मेरे ईश्वर
जीवित
मर मत जाना
कभी
सादर
डॉ पुष्पलता

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