“वैलेंटाइन डे विशेष’

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मेरा तो ये गुलाब हर उस फौजी को कुर्बान है।
जिसकी कुर्बानी से मेरा भारत देश महान है।।
क्यों दे गुलाब हम उनको जो है कोई बेगाने,
देंगे गुलाब हम उनको जो सीमा के है दीवाने।
बन्दूक में भरी जो गोली वही है उनके पैमाने,
सर्दी में भी वो डटे खड़े वहीं हैं उनके मैखाने।।
कोई त्यौहार ना मना पाए वो तो बेजुबान है।
मेरा तो ये गुलाब हर उस फौजी को कुर्बान है।
कैसा ये वैलेंटाइन डे “मलिक दिल धड़कता है,
एक आहट से हर फौजी बुरी तरह फड़कता है
उनके सीने में फौलादी का बादल गरजता है,
असली गुलाब वो जो फौजी वर्दी में सजता है।
देकर हमें सब खुशियां वो फिर भी गुमनाम हैं।
देश के लिए मरना मिटना यही उनका काम है।
गोलियों से भरी सुबह बारूदों से भरी शाम है।
मलिक का वैलेंटाइन डे बस उन पर कुर्बान है।
जिनकी कुर्बानी से मेरा भारत देश महान है।।
 
 सुषमा मलिक, रोहतक 

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