ये आज मेरे दिल में

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कशमकश  कैसी ये आज मेरे  दिल में
कि कुछ  मोती मैं  चिलमन से पिरो लूं
मेरे चांद से तू कुछ तो कम है ओ चंदा
आ तेरे अक्स  को मेरे महबूब से तोलूं
क्यों नहीं बोलता तू कुछ तो बोल ज़रा
चलो मैं ही कुछ उनकी तारीफ में बोलूं
मुखड़ा  उनका है ख़ूबसूरत तेरे मांनिद
आज  यह  राज़ सिर्फ तुझसे  ही खोलूं
कभी तुझे कभी उन्हें मैं सामने रखकर
कुछ भी तेरे हक़ में क्यों कहने से डोलूँ
सामने उन्हें देखकर ही आए क़रार
हमें उन्हें न देखूं जभी छुप-छुप के मैं रो लूं
मान ले बात मेरी मैं झूठ नहीं कहता हूं
चल अब छोड़ ज़िरह उनके साथ हो लूं
✍🏻नाम-दीपा संजय”*दीप*

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