कलंक चिन्ह इंडिया गेट को गिराकर उसी स्थान पर “अद्वितीय भारतीय स्वतंत्रता स्मारक” बनाया जाए।

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30 जुलाई को नामधारी संगत ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया, जिसमे उन्होंने लोगों को जागरूक किया कि “भारतीय भूमि पर बने गुलामी के सभी कलंक चिन्हों को गिराकर वहां अद्वितीय भारतीय स्वतंत्रता स्मारक बनाए जाएं”। नामधारी संगत के प्रतिनिधि ने बताया कि सतगुरु दलीप सिंघ जी (वर्तमान नामधारी गुरु) पिछले सात वर्षों से इस हेतु निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
“इंडिया गेट” के विषय में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि “इंडिया गेट” उन गद्दार भारतीयों की याद में बनाया गया था, जो हमारे देश भक्त भाइयों को मारते हुए और अंग्रेजों की तरफ से लड़ते हुए मर गए थे। वे वही भारतीय थे जिन्होंने वेतन व सुख-सुविधाओं के लिए अंग्रेजों का साथ दिया व अपने देश के साथ गद्दारी की। उन गद्दारों की याद में बना “इंडिया गेट” हम भारतीयों की धरोहर कैसे हो सकती है? यह तो हम सभी भारतीयों के मस्तिष्क पर कलंक चिन्ह है।
हम भारतीयों के लिए बहुत ही शर्म की बात है कि हम अपने देश में “इंडिया गेट” को अपनी विरासत के रूप में दिखाकर गर्व महसूस करते हैं तथा खुश होते हैं। जबकि, बर्मा (म्यांमार) व कम्बोडिया जैसे देश जो अंग्रेजों के गुलाम रह चुके हैं, उन देशों ने भी अपनी भूमि पर स्वतंत्रता स्मारक बना लिए हैं। परन्तु, हमने आज तक नहीं बनाया। इसलिए, सतगुरु दलीप सिंघ जी व नामधारी संगत पिछले सात वर्षों से मांग कर रही है कि “इंडिया गेट” को गिराकर उसी स्थान पर भारत का “अद्वितीय स्वतंत्रता स्मारक” बनाना चाहिए।
यदि भारत सरकार “कलंक चिन्ह इंडिया गेट को गिराकर, उस स्थान पर देश की आज़ादी के लिए शहादत देने वालों की याद में अद्वितीय स्वतंत्रता स्मारक बनाती है, तो यह उन महान शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी”।
प्रीति सिंह

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