गुढा का खेल बीएसपी के टिकट पर चुनाव जीतना, कांग्रेस सरकार में मंत्री बन जाना

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रामस्वरूप रावतसरे

बीएसपी से कांग्रेस में शामिल हुए राजेंद्र गुढ़ा  को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री बना दिया है। गुढ़ा अपने राजनीतिक बयानों के चलते चर्चा में रहते आये हैं। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के दौरे के वक्त पहले भी यह कहा था कि सड़के कैटरिना कैफ के गालों की तरह बननी चाहिए। जब उनके इस ब्यान पर बवाल हुआ और यह बात मुख्यमंत्री गहलोत तक पहुची और उन्होंने नसीहत दी तक गुढा ने यू टर्न लेकर कहा कि उनका मतलब सिर्फ इतना था कि उनके क्षेत्र में सड़कों की क्वालिटी अच्छी होनी चाहिये।
अब एक नया ही बयान दे डाला है जिसमें कांग्रेस की मजबूरी और बीएसपी का खोखलापन नजर आता है। गुढा का यह कहना कि मैं चुनाव बीएसपी से जीतता हूं और कांग्रेस में जाकर मंत्री बन जाता हूं। वापस जब कांग्रेस में दरी उठाने का टाइम आता है तो निकल लेता हूं। कह देता हूं, आप संभालो, आपकी कांग्रेस। अभी चुनाव में वापस बहनजी से टिकट ले आया। पहले बीएसपी से टिकट लिया जीता, फिर कांग्रेस में घुसा और मंत्री बन गया हंू। क्या मेरे इस खेल में कोई कमी है? गुढा के स्वागत समारोह में उपस्थित लोगों ने  इस कथन पर खूब ठहाके लगाए, तालियां भी पीटी।
राजनीतिक पण्डितों का कहना है कि गुढा के इस कथन से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और बसपा प्रमुख मायावती को अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लगा लेना चाहिए। इस कथन से पता चलता है कि गुढा जैसे राजनीतिज्ञ के सामने गहलोत और मायावती की क्या हैसियत है? 2008 में भी गुढ़ा बसपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ कर विधायक बने। तब भी गुढा ने मायावती को राजनीतिक धोखा दिया और कांग्रेस में शामिल हो गए। बसपा को धोखा देने के बाद 2018 में मायावती से दोबारा से टिकट हासिल कर लिया। ऐसा किस प्रकार हुआ यह भी  गुढा और उनके समर्थकों की ओर से पूर्व में कहा गया है कि बसपा में पैसे देकर टिकट मिलते हैं। जब पैसे देकर टिकट लिए जाएंगे, तब गुढा जैसे विधायक कांग्रेस में शामिल होकर कीमत तो वसूलेंगे ही। गुढा ने अपने कथन से कांग्रेस को भी आईना दिखा दिया है। गुढा ने 21 नवंबर को राज्य मंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। जानकारी के अनुसार गुढा चाहते हैं कि उनके साथ जो पांच विधायक कांग्रेस में शामिल हुए हैं, उन्हें भी संसदीय सचिव या किसी निगम बोर्ड आदि का अध्यक्ष बना कर मंत्री का दर्जा दिया जाए। राजेन्द्र सिहं गुढा के साथ जोगिंदर सिंह अबाना, संदीप यादव, वाजिब अली, लाखन सिंह और दीपचंद खेडिय़ा ने भी बसपा छोड़ कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। गुढा मंत्री का पद न संभाल कर सीएम गहलोत पर दबाव बना रहे हैं। गुढा के ब्यानों को लेकर गहलोत विरोधी गुट के नेताओं ने पूरे प्रकरण की जानकारी हाईकमान तक पहुंचाई है। जिससे गुढा तथा गहलोत को कटघरे में खड़ा किया जा सके।

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