हिंदी ओढी और बिछाई हिंदी पर अभिमान किया।

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की पावन पंक्तियों के साथ साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा के तत्वावधान में हिंदी पुरोधा राष्ट्रभाषा सेनानी साहित्य वाचस्पति श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा स्मृति एवं राष्ट्रीय बाल साहित्य समारोह 2022 कार्यक्रम आयोजन की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ओरैया, उत्तर प्रदेश से पधारे डॉ धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हिंदी भाषा को समृद्धि एवं शक्ति प्रदान करने में श्रद्धेय श्री भगवती प्रसाद देवपुरा जी का योगदान वर्तमान हिंदी प्रेमियों, हिंदी सेवियों के लिए एक प्रेरणा है। कार्यक्रम  की अध्यक्षता कर रहे पंडित महेश बोहरे जी ने कहा श्री देवपुरा जी व्यक्ति नहीं संस्था थे। जिनकी प्रेरणा विशिष्ट उदात्त गुणों से परिपूर्ण थी। उनका चिंतन और आत्मदर्शन ज्ञान के अक्षय कोष से सज्जित आज भी दिखाई देता है। वे साहित्य प्रेमियों के कल्याण में उदारता से सदैव ही समर्पित रहे।कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती पूजन, सरस्वती वंदना एवं श्रीनाथ वंदना के साथ हुआ। श्री हरि ओम हरि भरतपुर ने सरस्वती वंदना की ।श्री विट्ठल पारीख जयपुर ने श्रीनाथ वंदना से सभी के मन को भावविभोर किया। श्री रामेश्वर शर्मा रामू भैया कोटा द्वारा रचित “कीर्ति कुसुमावली” का पूरे सदन द्वारा वाचन किया गया। इस अवसर पर श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर  देश के विभिन्न स्थानों से पधारे रचनाकार एवं विद्वानों द्वारा काव्यार्चन एवं साहित्यार्चन भी किया गया। श्री महेश बोहरे, गुना , श्री रामेश्वर शर्मा रामू भैया, कोटा , श्री बंशीलाल लड्ढा कपासन, श्री विट्ठल पारीक, जयपुर डॉ अंजीव रावत, मथुरा, श्री प्रमोद सनाढ्य,श्रीनाथद्वारा, श्री हरि ओम हरि भरतपुर द्वारा काव्यार्चन एवं श्री “भगवती प्रसाद जी देवपुरा समग्र व्यक्तित्व” विषय पर श्री श्री कृष्ण शरद कासगंज, “जीवंत व्यक्तित्व के धनी : श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा” विषय पर प्रोफेसर सतीश चतुर्वेदी शाकुंतल गुना, “धरती से गगन तक : श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा ”  विषय पर डॉ धर्मेंद्र प्रताप सिंह औरैया,” जैसे मैंने देखे श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा”  विषय पर डॉ श्याम मनोहर व्यास, उदयपुर, “शलाका पुरुष श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा” विषय पर डॉक्टर इंद्रप्रकाश श्रीमाली, उदयपुर, “मेरे आदर्श प्रेरणा स्रोत श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा” विषय पर डॉ जयप्रकाश शाकद्वीपीय, उदयपुर ने साहित्यार्चन प्रस्तुत किया । कानपुर  से पधारे डॉ अजीत सिंह राठौड़ ने “बाल साहित्य और पर्यावरण ” विषय पर आलेख वाचन किया। इस अवसर पर डॉक्टर सतीश चतुर्वेदी शाकुंतल, गुना मध्य प्रदेश, रामनारायण शर्मा श्री गंगानगर को साहित्य सुधाकर, रामप्यारे प्रजापति सुल्तानपुर, श्री बजिंदर ठाकुर पटियाला को साहित्य कुसुमाकर, डॉ प्रियंका सोनी प्रीत, जलगांव, महाराष्ट्र को साहित्य सौरव, श्री ज्ञान प्रकाश पीयूष सिरसा को काव्य कुसुम, श्री महेश चंद्र गर्ग ,डूंगरपुर एवं श्री सागर सूट पटियाला को संपादक रत्न की भिन्न भिन्न उपाधियों से अलंकृत किया गया।साहित्य मंडल श्री नाथद्वारा के प्रथम दिवस के द्वितीय सांयकालीन सत्र में सम्मान समारोह, अभिनंदन एवं काव्यार्चन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं दोहाकार श्री रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने वर्तमान परिवेश में साहित्य और जीवन की प्रासंगिकता पर अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार श्री सतीश चतुर्वेदी शाकुंतल ने की। उन्होंने कहा साहित्यकार साहित्य का ही नहीं एक नवीन युग का सृजन करते हैं। आज बच्चों के चरित्र के उन्नयन की बेहद आवश्यकता है। इसके लिए बाल साहित्यकारों को संकल्पबद्ध होना चाहिए। भीलवाड़ा से पधारे साहित्य सेवी विशिष्ट अतिथि श्री वीरेंद्र जी लोढा ने कहा साहित्य मंडल आज भारत की एक ऐसी संस्था है जो हिंदी भाषा की समृद्धि के लिए संकल्पवद्ध  एवं प्रयासरत ही नहीं है अपितु यह है हिंदी सेवियों के मान सम्मान का प्रतीक है। इस अवसर पर श्री नाथद्वारा के समाजसेवी एवं साहित्य प्रेमी श्री दिनेश जी सनाढ्य ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।कार्यक्रम में गंगानगर से पधारे साहित्यकार , कवि एवं आध्यात्मिक गुरु श्री तनसुखराम शर्मा, मैनपुरी से पधारे शिक्षा शास्त्री एवं समाजसेवी श्री विनोद माहेश्वरी जी, का अभिनंदन किया गया। इस अवसर श्री रणछोड़ लाल ठक्कर स्मृति सम्मान से डॉक्टर अनुराग बस्नेत सिक्कम एवं श्रीमती लक्ष्मी देवी ठक्कर स्मृति सम्मान से डॉ नम्रता चतुर्वेदी सिक्किम को पुरस्कृत किया गया। गंगानगर से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉक्टर रामनारायण शर्मा को साहित्य सुधाकर एवं कोटा से  पधारीं साहित्यकार डॉ अनीता वर्मा को साहित्य सौरभ की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।कार्यक्रम में  कोटा के बाल साहित्यकार श्री रामेश्वर शर्मा  रामू भैया , झालावाड़ से पधारी श्रीमती आशा रानी जैन आशु एवं कानपुर उत्तर प्रदेश से पधारी डॉ लक्ष्मी सुधांशु त्रिपाठी को भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति बाल साहित्यकार सम्मान से सम्मानित किया गया।इस अवसर पर जादुई बगीचा, पंख मुझे मिल जाते, बापू से विराट, सूनी डाल महकते फूल, आलोक रश्मियां, बिल्लो मौसी, मेरे पापा बस्ता लाए ,हिंदी वर्णमाला, तोता बोला खरी खरी इत्यादि पुस्तकों का विमोचन सम्मानित मंच द्वारा किया गया।इस अवसर पर डीग के कवि श्री सुरेंद्र सार्थक ने हिंदी महिमा, एवं भोपाल के गीतकार गीतेश्वर बाबू घायल ने श्रंगार के गीत सुनाए।कार्यक्रम का संचालन श्री श्याम प्रकाश देवपुरा एवं श्री विट्ठल पारीक ने किया।इस अवसर पर श्रीकृष्ण शरद कासगंज, धर्मेंद्र प्रताप सिंह औरैया, अजीत सिंह राठौड़ आदि उपस्थित रहे।इस अवसर पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री गौरीशंकर वैश्य विनम्र लखनऊ, श्री कृष्ण जी शरद, कासगंज, श्री विनोद माहेश्वरी मैनपुरी  ने भी अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए । कार्यक्रम का प्रतिवेदन साहित्य मंडल के प्रधान मंत्री श्री श्याम प्रकाश जी देवपुरा  जी ने किया। कार्यक्रम का संचालन श्री विट्ठल पारीक, हरि ओम हरि भरतपुर ने किया। इस अवसर पर श्री सुरेंद्र सार्थक ,पीयूष देवपुरा, तनसुख राम शर्मा, इंद्रजीत कौशिक, उमेश कुमार चौरसिया ,सुरेश चंद सर्वहारा, नगेंद्र मेहता भव्य, उषा सोमानी, राजीव सक्सेना, डॉक्टर राजकुमार निजात आदि उपस्थित रहे।श्री भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति राष्ट्रीय बाल साहित्य समारोह के द्वितीय दिवस दिनांक 7 जनवरी 2022 की रात्रि सत्र में भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता ब्रजभाषा साहित्य अकादमी के पूर्व सचिव श्री विट्ठल पारीक जयपुर , प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ धर्मेंद्र प्रताप सिंह औरैया, साहित्यकार श्री महेश बोहरे, गुना , साहित्यकार श्री बंशीलाल लड्ढा कपासन ने की।कार्यक्रम की शुरुआत सिहोर से पधारे श्री गीतेश्वर बाबू घायल ने  “सुवास निर्विकार दो अनंत ब्रह्म नाद दो, मां ज्ञान दायिनी नवीन कथ्य का प्रसाद दो”  शब्दों से मां शारदे की वंदना की। कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करते हुए सिरसा के कवि डॉक्टर राजकुमार निजात ने बहुत ही रोचक दोहे सुनाए। “समय हाथ से थाम कर, जिसने रखा हाथ। उसके अपने हो गए, पल भर में श्रीनाथ।” जयपुर की डॉक्टर सरोज गुप्ता ने मीरा भाव पर “नजर भर देख लो मुझको, मैं मिलने तुम से आई हूं ।” पंक्तियों से सब को भावविभोर कर दिया।दोसा की कवि श्री जगदीश प्रसाद गुप्ता एडवोकेट ने “देश का क्या होगा भगवान से “पनपते भ्रष्टाचार पर आघात किया । डॉक्टर सतीश चतुर्वेदी शाकुंतल ने “सागर को मिलता रहा सदा नदी का नीर, फिर भी वह खारा रहा यही नदी की पीर।” पंक्तियों से सभी को प्रफुल्लित कर दिया ।भीलवाड़ा के कवि ओम उज्जवल ने “जन्मभूमि महाराणा प्रताप की कुंभलगढ़ देखने को उसे बार-बार मन करता है।” सुनाकर सभी के मन में देशभक्ति के भाव उत्पन्न किए। फगवाड़ा से पधारे श्री मनोज फगवारी ने “सुबह मोहब्बत, शाम मोहब्बत, अपना तो पैगाम मोहब्बत।” पंक्तियां सुनाकर सभी को आनंदित किया।पटियाला के कवि सागर सूद ने “ना मंदिर को बनाना तुम, न कोई देवता रखना। बुजुर्गों के लिए लेकिन जगह घर में सदा रखना ।” सुनाई । कानपुर से पधारी डॉक्टर लक्ष्मी सुधांशु त्रिपाठी ने “वह शमा जो जलाई है, तुमने यहां , वह शमा तो जले कि यह रखना यकीन।”  सुनाकर सभी को आनंदित किया। कासगंज के कवि डॉ श्रीकृष्ण शरद ने “अपराध नहीं प्यार क्यों दुनिया से छुपाए हमने तुम्हें चाहा है हजारों में कहेंगे ।” सुनाकर सभी से दाद बटोरी ।अलवर के कवि सुरेंद्र सार्थक ने “मैं झरना हूं मैं झरता हूं तो पर्वत फोड़ देता हूं।” भरतपुर के कवि हरि ओम हरि ने अपनी छंदों और मुक्तकों से सभी को भावविभोर किया। वहीं अंजीव अंजुम ने ” सब कुछ ठहर गया लगता है ,गांव का मुखिया शहर गया लगता है ।” पंक्तियों से बाबूजी श्री भगवती प्रसाद देवपुरा को शब्दांजलि दी। विट्ठल पारीक जयपुर ने “न जाने यह कैसी हवा चल रही है। हिमगिरी के मन में लगन जल रही है ।वो नफरत के रंग में रंगे हाथ कैसे।मनुजता की सब सभ्यता मर रही है ।”पंक्तियों से पूरे सदन को आनंदित किया।कार्यक्रम में गीतेश्वर बाबू घायल, ओम प्रकाश शर्मा ,अजीत सिंह राठौड़ ,महेश बोहरे, बजिंद्र ठाकुर , प्रियंका सोनी प्रीत, बंसीलाल लड्ढा ने भी कविता सुनाकर सभी को भावविभोर किया। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध व्यंग्यकार सुरेंद्र सार्थक एवं कवि हरिओम हरि ने किया। कार्यक्रम में  प्रधानमंत्री साहित्य मंडल श्री श्याम प्रकाश देवपुरा,प्रधूयम्न देवपुरा ,अनिरुद्ध देवपुरा  उत्कर्ष नारायण, रामेश्वर शर्मा रामू भैया, वीरेंद्र लोढा, रेखा स्मित, सुरेंद्र गुप्ता ओम प्रकाश पांडे,  समेत अनेक श्रोता उपस्थित रहे ।

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