आत्मकथ्य – कैसी रही वर्ष 2017 मेरे लिए 

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        ये जिंदगी भी ना कभी हंसाती है तो कभी बहुत रूलाती है | पग-पग पर परीक्षा लेती रहती है और एक छोटी-सी भूल करने पर साथ भी छोड़ देती है | तब मिला न मिला सब बराबर हो जाता है | संगे-संबंधी, यारदोस्त, चाहने वाले दो – चार दिन झूंठ-मूंठ का माथा पीटते हैं और फिर हमेशा-हमेशा के लिए भूल जाते हैं | अगर इस संसार में हमेशा के लिए अपनी पहचान बनाना चाहते हो तो नेक कर्म करो | नेक कर्म यहां भी काम आयेंगे और वहां भी… अगर नेक कर्म कर नहीं सकते तो बुरे भी मत करो, मुझे लगता है यही इंसानियत है |

कैसी रही वर्ष 2017 मेरे लिए ? –

1- जनवरी :- ग्रह ग्रहस्ती के झमेलों में डूबता – उछलता और थोड़ी बहुत साहित्यिक सेवा में गुजर गया |
2- फरवरी :- सबकुछ ठीक ठाक चल रहा था कि एक दिन बाजार जाते समय एक छोटी-सी बाईक दुर्घटना झेलनी पडी | इसी महीने एक क्षेत्रीय साधु –  सबाधू से सम्पर्क हुआ | महाराज के पास करोड़ों की सम्पति थी और मैं उसकी सहायता से अपनी अप्रकाशित क्रतियों को प्रकाशित कराना चाहता था | महाराज की सहमति मिल चुकी थी, पर फरवरी माह के अंत में उनकी निर्ममता से हत्या हो गयी और मेरा यह सपना यहीं समाप्त हो गया |
3- मार्च :- यह माह मेरे लिए कुछ विशेष रहा | फेसबुक के माध्यम से आजमगढ़ के मूल निवासी आदरणीय रामसूरत बिंद जी से सम्पर्क हुआ और फिर घंटो फोन पर बात सोशल मीडिया पर चेट, यह सब आज भी अनवरत चल रहा है | आदरणीय रामसूरत बिंद एक फिल्म निर्माता, समाजसेवी व व्यवसायी हैं | मेरी उनसे अच्छी बहुत अच्छी पटी और आज भी पट रही है | बिंद साहब बहुत ही सीधे – सच्चे सरल हृदय इंसान हैं |
4- अप्रैल :- इस माह में आगरा के युवा फ्रेंडस् क्लब के एक कार्यक्रम में भाग लिया | ये लोग बाबा साहेब की शिक्षाओं को बढावा देने के नाम पर स्वयं का उल्लू सीधा कर रहे हैं | मैंने देखा सब ढोंगी ढोंग रचा रहे हैं |
5- मई :- यह माह मेरे लिए साल 2017 का बहुत ही भाग्यशाली महीना होता पर हुआ नहीं… मैं हिंदी फीचर फिल्म – पहल में अभिनय के वास्ते घर से निकला | आगरा फोर्ट (रेलवे स्टेशन) से बैरंग लौट आया, किंहीं कारणों से, जिनका जिक्र करना मैं यहॉ उचित नहीं समझता |
6- जून :- यह महीना पारिवारिक दृष्टि से मेरे लिए हृदय दु:खाने वाला रहा… |
7- जुलाई :- यह माह साहित्य, कला, संस्कृति, धर्म की दृष्टि से मेरे लिए बहुत खास रहा | अपनी अकादमी का कार्यक्रम गांव के ही स्कूल में रखा | जिसमें अपने शैक्षिकगुरू आदरणीय मुरारीलाल वर्मा जी का सम्मान किया | हालांकि कार्यक्रम बहुत छोटा था पर हमें मीडिया कवरेज भरपूर मिली थी | इसके साथ ही बटेश्वर, बाह में एक धार्मिक कार्यक्रम का हिस्सा भी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और इस कार्यक्रम को भी मीडिया ने खूब महत्व दिया |
8- अगस्त :- व 9- सितम्बर :- ये दोनों माह साहित्य, कला, संस्कृति व कृषि की सेवा में गुजर गये |
10- अक्टूबर :- यह माह सबसे खास रहा, क्योंकि पहली बार आगरा में एक फिल्म प्रोडक्शन हाउस के द्वारा सम्मान मिला और मैंने यह सम्मान पहली बार मंच से ग्रहण किया | इसके साथ ही एक दुर्घटना से भी बाल-बाल बच गया |
11- नवम्बर :- इस माह में मुझे लगा कि मेरी बेरोजगारी खत्म हो जायेगी, पर ऐसा हुआ नहीं | बात यह थी कि मैंने पराविधिक स्वयं सेवक नामक पद के लिए इंटरव्यू दिया | पर चढावा ने सारा काम बिगाड़ दिया |
12- दिसम्बर :- पारिवारिक जिम्मेदारीओं को निभाते – निभाते यह माह भी अपने अंतिम पढाव पर है और इसके साथ ही वर्ष 2017 भी… अंतिम कार्यक्रम 23 व 24 दिस. आर्यसमाज आगरा का जिंदगीभर याद रहेगा |

              कुलमिलाकर वर्ष 2017 जिंदगी के उतार – चढाव दिखाकर बिदा हो रही है | इस वर्ष ने मुझे ढेर सारे सम्मान दिलाये, ढेर सारी मेरी टूटी – फूटी रचनाओं को प्रकाशित किया | मैं बहुत- बहुत आभारी उन तमाम सम्मानित सम्पादक महोदयों / महोदयाओं का जिन्होंने मेरी रचनाओं व रिपोर्टस को अपने पत्र – पत्रिका, बेवसाईटस, न्यूज चैनल आदि में प्रकाशित / प्रसारित किया |
मैं हृदय से आभारी हूं अपने पोस्ट मास्टर आदरणीय लायक सिंह गुर्जर जी व उनके पौत्र रोहित बाबू का जिन्होंने हमेशा मेरी डाक को नियमित मुझ तक पहुंचाया और मेरी रचनाओं ने देश- विदेश की पत्र – पत्रिकाओं में स्थान प्राप्त किया | तमाम प्रतिष्ठित व्यक्तियों से परिचय हुआ | साथ ही मित्र राहुल परिहार का भी मैं हृदय से आभारी हूं, जिसने सोशल मीडिया सहित तमाम इंटरनेटी जानकारी मुझे प्रदान की और मैंने भी आधुनिक उपकरणों का बहुत लाभ उठाया | इनके साथ ही निर्माता – निर्देशक टी. एम. मोहन सारस्वत जी का हृदय की अनन्त गहराईयों से कोटिश आभार, जिन्होंने मेरी शॉर्ट स्टोरी – मंत्रीजी का बयान पर इसीनाम से शॉर्ट फिल्म बनाने का निर्णय लिया |

          बाकी सब ठीक ही रहा अगर दु:ख है तो बस इस बात का कि मैं अपनी पारिवारिक, सामाजिक व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारीओं को सही तरीके से नहीं निभा पा रहा | और इसका मुझे खेद है, अब आगे देखना है कि वर्ष 2018 क्या गुल खिलाती है | गुल खाने के लिए पूरी साल जिंदा रहूंगा भी कि नहीं, पता नहीं…!

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