स्वर कोकिला लता मंगेशकर आज भी संगीत प्रेमियो के दिलों में जिंदा है

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lal bihari

लाल बिहारी लाल

स्वर कोकिला लता का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में सबसे बड़ी बेटी के रूप में पंडित दीनानाथ मंगेशकर के घर हुआ था। उनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक थे। इनके परिवार से भाई हृदयनाथ मंगेशकर और बहनों- उषा मंगेशकर ,मीना मंगेशकर और आशा भोंसले सभी ने संगीत को  ही अपनी आजीविका का साधन बनाया।
लता का जन्म तो इंदौर में हुआ था लेकिन उनकी परवरिश  महाराष्ट्र में हुई । इसलिए इन्हें मराठी का ज्ञान भी था। ये बचपन से ही गाना गाना चाहती थी परन्तु इनके पिता फिल्मों में गाने के पक्षधर नही थे। फिर भी इन्होंने अपना पहला गाना मराठी  फ़िल्म कीर्ती हसाल  के लिये गाया। लता तेरह साल की थी तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नही थी। लता को पैसों की बहुत किल्लत झेलनी पड़ी और काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्हें अभिनय बहुत पसंद नहीं था लेकिन पिता की असामयिक मृत्यु की कारण से पैसों के लिये उन्हें कुछ  हिन्दी और मराठी फिल्मों में काम करना पड़ा। अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली फिल्म पाहिली मंगलागौर (1942) रही, जिसमें उन्होंने स्नेह प्रभा प्रधान की छोटी बहन की भूमिका निभाई थी। बाद में उन्होंने कई फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें, माझे बालचिमुकला संसार (1943)) , गजभाऊ  , बड़ी माँ , जीवन यात्रा , माँद , छत्रपति शिवाजी (1952)  शामिल थी। इन दस सालों में अभिनय के बाद भी गायिकी के मन में दबी आवाज अंकुरित होती रही  और सन् 1947 में वसंत जोगलेकर ने अपनी फ़िल्म आपकी सेवा में  लता को गाने का मौका दिया। इस फ़िल्म के गानों से लता की खूब चर्चा हुई। इसके बाद लता ने मज़बूर फ़िल्म के गानों “अंग्रेजी छोरा चला गया” और “दिल मेरा तोड़ा हाय मुझे कहीं का न छोड़ा तेरे प्यार ने” जैसे गानों से अपनी स्थिती सुदृढ की। हालाँकि इसके बावज़ूद लता को उस खास हिट की अभी भी तलाश थी। 1949 में बनी  फ़िल्म “महल” के गीत “आयेगा आनेवाला”  से काफी शोहरत मिली। इस गीत को उस समय की सबसे खूबसूरत और चर्चित अभिनेत्री मधुबाला पर फ़िल्माया गया था। यह फ़िल्म अत्यंत सफल रही थी और लता तथा मधुवाला  दोनों के लिये बहुत शुभ साबित हुई। इसके बाद लता ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लता जी 30 भाषाओं में. 30000 से अधिक. फिल्मी और गैर फिल्मी गीत गा चुकी है। सन 1974  में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का गिनीज़ बुक रिकॉर्ड भी इनके नाम है। उन्हे महाराष्ट्र सहित कई राज्य सरकारे एवं केन्द्र सरकार भी सम्मानित कर चुकी है। इनके गाये हुए गीतो का भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया दीवाना है। ऐसी महान हस्ती विड़ले ही चमन की शोभा बढ़ाने आती है। इन्होंने अंतिम सांस 6 फरवरी 2022 को ली फिर भी संगीत प्रेमियों के दिलों में आज भी जिंदा है।
पुरस्कार इनके जिंदा रहते हुए इनके नाम पर दी जाती थी । इन्हें  6 बार फिल्म फेयर पुरस्कार (1958, 1962, 1965, 1969, 1993 और 1994), तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार (1972, 1975 और 1990),  1969  में पद्म भूषण,1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार, 1999 – पद्म विभूषण  तथा 2001 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया। इनके जयंती पर इस बार  अयोध्या में लता मंगेशकर चौक का वर्चुअल अनावरण माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी इनके जन्म दिन पर 28 सितंबर को करेगे। इस चौक संवारा जा रहा है और एक बहुत बड़ा वीणा भी लगायी जा रही है जो दर्शकों के आकर्षण का केन्द्र बनते जा रहा है।

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