पद्ममावती का नाम बेचकर…

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पद्ममावती का नाम बेचकर बताओ कब तक खाओगे
दूजे के घर पत्थर फेंकने वाले अपने को कैसे बचाओगे
हमारें राष्ट्र की शान है माँ पद्ममावती का जौहर सुनलों
ऐसी पतिव्रता स्त्रियों को इतिहास में  ढूढ़ते रह जाओगे
छेड़ो मत तुम फ़िर से अब हम राजपूतों की तलवारों को
ख़िलजी के बेवकूफ़ वंशजों अपना सर कलम करवाओगे
बहूत हुई भाँड़गिरी जाओ जायसी का काव्य पढ़के आओ
शहद देख छतों में कंकड़ मारोगे तो मुँह की फ़िर खाओगे
माना कि हम हिन्द वासी मधु रखतें है दिल और जुबान में
रंजिश हो तो काट खाने की उपलब्धियां अपनी गिनवाएँगे
ये धर्मचक्र नहीं कुछ झंडो का,ये आन हमारे राजपूतों की
कोई नेतागिरी कोई राजनीति नहीं जो गांधीगिरी दिखाएंगे
अश्वमेघ का घोड़ा ले निकलेंगे , फिर अपनी आना बचाना
तलावरें होंगी हाथों में हमारे जय भवानी की हम तो गाएंगें
जब करोगे अपनी भाँड़गिरी में ,हमारे इतिहास से छेड़छाड़
ऐतिहासिक शपथ ले लों इतिहास को फिर हम दोहराएंगे
अशोक सपड़ा हमदर्द की क़लम से दिल्ली से
अशोक सपड़ा की क़लम से दिल्ली से

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