राजस्थान के बेराजगार लखनऊ में जाकर धरना दें,क्या प्रदेश सरकार के लिए उचित है!

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रामस्वरूप रावतसरे

राजस्थान के बेरोजगार पिछले 5 दिनों से उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय लखनऊ के बाहर अपनी 22 सूत्री मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं। बेरोजगारों का कहना है कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने उनके साथ वादाखिलाफी की है। ऐसे में वह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मिल अपनी समस्या का समाधान चाहते हैं।
राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव के नेतृत्व में दो सौ से भी ज्यादा बेरोजगार युवक 28 नवंबर से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं। यादव के अनुसार बेरोजगार युवाओं ने कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन लखनऊ के कांग्रेस कार्यालय में उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। कार्यालय के बाहर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राजस्थान के युवाओं के साथ बदसलूकी भी की।
यादव के अनुसार वे प्रियंका गांधी को कांग्रेस शासित राजस्थान में बेरोजगारों की स्थिति से अवगत करवाना चाहते हैं। महासंघ ने बेरोजगारों की समस्याओं को कई बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समक्ष रखा है। अभी डेढ़ माह से जयपुर में धरना दिया जा रहा है, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। 2018 के विधानसभा चुनाव में बेरोजगारों ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी। तब राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस की सरकार बनने पर बेरोजगारों की समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा। राहुल गांधी के आश्वासन के बाद ही विधानसभा चुनावों में बेरोजगारों ने कांग्रेस की सरकार का समर्थन किया था।
कांग्रेस की सरकार बने तीन वर्ष गुजर जाने के बाद भी बेरोजगारों की मांगे पूरी नहीं हुई है। उनके अनुसार प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश के बेरोजगारों के लिए जो मांग उत्तर प्रदेश सरकार से कर रही हैं, वे ही मांग राजस्थान के बेरोजगारों की है। चूंकि राजस्थान में अशोक  गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार बेरोजगारों की नहीं सुन रही है, इसलिए उन्हें प्रियंका गांधी से मिलने के लिए लखनऊ आना पड़ा है। प्रियंका गांधी से मिलने तक वे लखनऊ में ही रहेंगे। यादव ने बताया कि राजस्थान से आए सैकड़ों युवा बेरोजगार लखनऊ की सड़कों पर ही ठहरे हुए हैं। राजस्थान के बेरोजगारों के सामने भूखों मरने की स्थिति है।
बेरोजगार राजस्थान सरकार से जो मांग कर रहे है उनमें नर्सिंग भर्ती 2013 के वंचित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने, प्रयोगशाला सहायक भर्ती 2018 चिकित्सा विभाग की चयन सूची जारी करने, स्कूल व्याख्याता भर्ती 2018 में कम किए गए 689 पद जल्द से जल्द जोड़कर सूची जारी करने, रीट शिक्षक भर्ती 2021 में 5000 पदों पर विशेष शिक्षकों के पद निकालने, रीट शिक्षक भर्ती 2021 में 31 हजार से बढ़ाकर 50 हजार करने, शिक्षक भर्ती 2012 मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के पक्ष में प्रार्थना पत्र देने,  रीट शिक्षक भर्ती 2018 को पूरी करने, पंचायती राज एलडीसी भर्ती 2013 का नियुक्ति प्रक्रिया का कैलेंडर जारी करने , टेक्निकल हेल्पर, पंचायतराज जेईएन, कंप्यूटर अनुदेशक भर्ती, फर्स्ट ग्रेड, सेकंड ग्रेड (पीटीआई भर्ती के 461 पदों की संख्या बढ़ाकर 2000 पदों पर) की विज्ञप्तियां जारी करने, नीमराणा कमलादेवी परीक्षा केंद्र पर दर्ज 6 बेरोजगार अभ्यर्थियों के मुकदमे वापस लेने,  प्रतियोगी परीक्षा में गैर जमानती कानून का अध्यादेश लाने, चिकित्सा विभाग में नई भर्तियों की विज्ञप्तियां जारी करने, बाहरी राज्यों का कोटा कम करके प्रदेश के बेरोजगारों को प्राथमिकता देने, प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र गृह जिले में एवं परीक्षा केंद्र सरकारी स्कूलों में दिया जाए और सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई लगाने सहित प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में बायोमेट्रिक वीडियोग्राफी अनिवार्य रूप से करवाने की मांग की है। लेकिन गहलोत सरकार के नहीं सुनने पर बेरोजगार उत्तर प्रदेश प्रियांका गांधी की शरण में गये है।
राजस्थान के बेरोजगारों का विरोध अब सियासी रंग लेने लगा है। इस आंदोलन के लिए कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ही जिम्मेदार ठहरा दिया है। आचार्य प्रमोद ने ट्वीट कर खुद की मुसीबत को प्रियंका गांधी के गले में डालने का आरोप भी लगाया। आचार्य प्रमोद ने ट्वीट किया है- यूपी कांग्रेस मुख्यालय के बाहर धरना दे रहे राजस्थान के बेरोजगारों से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को तत्काल बातचीत कर समस्या का समाधान निकालना चाहिए। अपनी मुसीबत को प्रियंका गांधी जी के गले में डाल देना उचित नहीं है।
राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव  के अनुसार गत विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष सचिन पायलट ने भरोसा दिलाया था कि कांग्रेस की सरकार बनने पर सरकारी भर्तियों में विसंगतियों को हटाया जाएगा तथा भर्ती प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। लेकिन कांग्रेस की सरकार को तीन वर्ष गुजर जाने के बाद भी बेरोजगारों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। हम तीन वर्ष से लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन गहलोत सरकार में सुनवाई नहीं हो रही है। उन्हें मजबूरन प्रियंका गांधी से मिलने के लिए लखनऊ आना पड़ा। लखनऊ आने का इतना असर तो हुआ ही है कि सीएम गहलोत ने हमारे आंदोलन का जिक्र तो किया। उपेन ने कहा कि सैकड़ों युवा लखनऊ की सड़कों पर है। सर्द रात में खुले में सोना पड़ रहा है, सीएम गहलोत को यह नहीं भूलना चाहिए कि दो वर्ष बाद विधानसभा के चुनाव हैं। युवाओं के दम पर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी, अब यदि युवाओं के साथ विश्वासघात किया जाएगा तो कांग्रेस का भी वही हश्र होगा तो भाजपा का हुआ था।
सरकारी सेवा में नियमित करने की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे संविदाकर्मियों के पक्ष में अब सचिन पायलट समर्थक वन व पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी उतर गए हैं। चौधरी ने संविदाकर्मियों को नियमित करने की पैरवी की है। पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में भी यह मामला उठाया था।
हेमाराम चौधरी के अनुसार संविदाकर्मियों को नियमित करने का हमने चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया था। इसी वजह से वे लोग धरने पर बैठे हैं। उनके मंत्री बनने के बाद कैबिनेट की पहली बैठक में ही संविदाकर्मियों को नियमित करने का मुद्दा रखा। तीन साल हो गए। हमारे घोषणा पत्र में वादा था। इस वजह से ही वे लोग धरने पर बैठे हैं। बैठक में मुख्यमंत्री ने सर्विस कैडर बनाकर जल्द हल करने का आश्वासन दिया है। मुझे उम्मीद है। जल्द इस पर फैसला होगा। हेमाराम चौधरी संविदा कर्मियों को नियमित करने की मांग पहले भी कई बार उठा चुके हैं। विधानसभा में भी कई बार उन्होंने घोषणा पत्र में किए गए वादे के अनुसार संविदाकर्मियों को नियमित करने का मुद्दा उठाया था।
राजनीतिक पार्टियां सत्ता में आने के लिए बहुत से वादे करती है। जो किसी प्रकार से सम्भव नहीं होता उसको भी करने की सहमती देती है। जब सत्ता मिल जाती है उसके बाद उनकी सियासत शुरू हो जाती है। सारे वादे उन्हें याद दिलाने पर भी याद नहीं आते। यहां तक कि इनका स्वयं का घोषणा पत्र भी चुनावी मंचों तक ही सिमटकर रह जाता है। यही स्थिति राजस्थान में बेरोजगारों की बनी हुई है। जबकि सरकार को आगे आकर अपनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए इनसे बात आन्दोलन को समाप्त कराना चाहिए। सरकार और सरकार में बैठे जिम्मेदारों का यह कर्तव्य बनता है।

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