साहित्य परिषद् ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन

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बहादुरगढ़। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की जिला इकाई द्वारा सेक्टर 9 स्थित विवेकानंद पार्क के सामने कृष्ण कुंज में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्था के जिला संयोजक विरेन्द्र कौशिक के सानिध्य व स्थानीय समाजसेवी सुशील कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस गोष्ठी में उपस्थित रचनाकारों ने सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं व कोरोना सहित विभिन्न सामयिक विषयों पर अपनी कविताएं सुनाकर भावविभोर किया। गोष्ठी का संचालन कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राजकुमार गाईड द्वारा संकलित चुटकुलों पर आधारित हल्की फुल्की रचनाओं से हुआ। युवा कवि कुमार राघव ने कोरोना काल में अतिरिक्त सावधानी बरतने का संदेश देते हुए कहा-

मौत बसी हो जब कण-कण में,
मित्र शपथ यह लेना तुम।
जब भी कोई विपदा आए,
साथ स्वयं का देना तुम।

सुनीता सिंह ने अपने बचपन की स्मृतियों को ताज़ा करते हुए कहा-
सपनों की रुपहली नगरी में कुछ परियाँ नाचा करती थीं,
पलकों की कोरों पर बैठी वे चिट्ठियाँ बाँचा करती थीं।
उन चिट्ठियों में जुगनु, तितली और तारे बेशुमार मिले,
कुछ रूठे, कुछ बिछुड़ गए, कुछ सात समंदर पार मिले।
मेरे प्यारे बचपन में लम्हे , अनमोल हज़ार मिले…

समय के उतार चढ़ाव को रेखांकित करती अपनी रचना में कवि-कलाकार वीरेंद्र कौशिक ने कहा-
हौसलों की उड़ान जिसने है भरी ,
वो ही आसमां से तारे तोड़ लाता है ।
वक्त ही है जो इंसान को राजा बनाए,
इंसान को भिखारी भी वक्त ही बनाता है।

सतपाल स्नेही ने श्रंगार रस की रचनाएं सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध किया। एक बानगी देखिए-
चाँद-सितारों-सी चहको तो दिखती हो भरपूर गगन,
लहरा कर चलती हो तुम तो एक नदी-सी लगती हो।
मित्रों के अनुरोध पर उन्होंने कुछ हरियाणवी हास्य रचनाएं भी सुनाईं।

गोष्ठी का संचालन कर रहे कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने देश के दुश्मनों को चेतावनी देते हुए कहा-
न देंगे वतन की माटी हम,
चाहे यह शीश कटा देंगे।
जो हमको ठेस लगायेगा,
हम उसको आग लगा देंगे।

सुशील कुमार के अध्यक्षीय संबोधन के साथ गोष्ठी का विधिवत समापन हुआ।

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