सामाजिक बहस

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आज समाज के हर कडी़ में फिटमेन्ट हो रहा है,
शोषक और शोषण में सेटलमेंट होरहा है।
समाज के चापलूसों का परमानेन्ट हो रहा है,
कर्ता और कारक में डिफरेन्ट हो रहा है।
इंसानियत के मूर्ति का पनिस्मेन्ट हो रहा है,
भ्रष्ट और भ्रष्टाचारियों का डेवलप्मेन्ट हो रहा है।
पढ़नेवाले बच्चों का कम्पार्टमेंट हो रहा है,
पास्पोर्ट के धीर पुत्रों का इम्प्रूवमेन्ट हो रहा है।
हत्यारे और प्रशासन में ऐडजस्टमेन्ट हो रहा है,
बिना कार्य का कार्य दिखाए ऐसा  जजमेंट हो रहा है।
जनता के लहू शोषक का अपलिफ्मेन्ट हो रहा है,
हर क्षेत्र में ऐसा ही आज मैनेजमेन्ट हो रहा है।
घोर परिश्रम करनेवाले का रिफ्रेशमेन्ट हो रहा है,
कहे राय अब ऐसा ही सोसल अर्गूमेन्ट हो रहा है।
                    देवेन्द्र कुमार राय
(ग्राम+पो०-जमुआँव, पीरो, भोजपुर, बिहार )

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